हम्पी को टाईब्रेकर में हरा दिव्या बनीं चैंपियन, फिडे महिला विश्वकप शतरंज का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय

चैंपियन बनने के बाद निकले आंसू, मां को गले लगाया 

हम्पी को टाईब्रेकर में हरा दिव्या बनीं चैंपियन, फिडे महिला विश्वकप शतरंज का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय

महिला शतरंज विश्व कप के फाइनल मुकाबले में दिव्या देशमुख ने ग्रैंडमास्टर और हमवतन कोनेरू हम्पी को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया।

नई दिल्ली। महिला शतरंज विश्व कप के फाइनल मुकाबले में दिव्या देशमुख ने ग्रैंडमास्टर और हमवतन कोनेरू हम्पी को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। वह फिडे महिला शतरंज विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। कोनेरू हम्पी के पास वापसी का एक छोटा सा मौका था, लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा सकीं। दिव्या ने काले मोहरों पर एक शानदार जीत दर्ज की।

अंतरराष्ट्रीय मास्टर दिव्या देशमुख ने अपने से ऊंची रैंकिंग वाली ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी को फाइनल के पहले और दूसरे गेम में कोई मौका दिए बिना ड्रॉ खेलने पर मजबूर किया था। इससे मैच टाईब्रेकर में पहुंचा था। दिव्या ने टाईब्रेक में जीत के साथ चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

कौन हैं दिव्या देशमुख ?

9 दिसंबर 2005 को नागपुर में जन्मीं दिव्या ने पांच साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। उनके माता-पिता डॉक्टर हैं। दिव्या ने 2012 में सात साल की उम्र में अंडर-7 नेशनल चैंपियनशिप जीती। अंडर-10 (डरबन, 2014) और अंडर-12 (ब्राजील, 2017) कैटेगरी में विश्व युवा खिताब भी जीते। इसके बाद 2014 में डरबन में अंडर-10 वर्ल्ड यूथ टाइटल और 2017 में ब्राजील में अंडर-12 कैटेगरी में भी खिताब अपने नाम किए।

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2023 में हासिल किया इंटरनेशनल मास्टर का खिताब :

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दिव्या ने 2023 में इंटरनेशनल मास्टर का खिताब भी प्राप्त कर लिया। 2024 में उन्होंने विश्व जूनियर गर्ल्स अंडर-20 चैंपियनशिप में शीर्ष स्थान हासिल किया। 45वें चेस ओलंपियाड में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। दिव्या एशियाई जूनियर चैंपियन भी हैं।

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चैंपियन बनने के बाद निकले आंसू, मां को गले लगाया :

जीत हासिल कर दिव्या फूट फूटकर रो पड़ीं। उनकी मां भी वहीं मौजूद रहीं और दिव्या ने उन्हें गले लगा लिया। जीत के बाद दिव्या को उनके परिवार वालों ने घेर लिया और सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे। मैच के बाद दिव्या ने कहा, मैं अभी तक इस जीत पर यकीन नहीं कर पा रही हूं। इसमें ढलने के लिए मुझे थोड़ा समय चाहिए होगा। मुझे लगता है कि यह किस्मत से हुआ कि मुझे इस तरह से ग्रैंडमास्टर का खिताब मिला। नागपुर की दिव्या ग्रैंडमास्टर बनने वाली सिर्फ चौथी भारतीय महिला और कुल 88वीं खिलाड़ी हैं। 

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