गाजा संघर्ष को खत्म करने की जुगत : भारत को बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने के लिए ट्रंप का निमंत्रण, मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण के कदमों पर करेंगे विचार
परमानेंट सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति के लिए बनाए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस में भारत को शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह पहल ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है। बोर्ड गाजा में शांति, पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता की निगरानी करेगा। भारत की वैश्विक साख के चलते यह प्रस्ताव अहम माना जा रहा है।
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा में शांति बहाली के लिए बनाए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया है। यह बोर्ड गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने और शांति प्रकिया को आगे बढ़ाने के लिए बनाया जा रहा है। साथ ही यह पहल गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है। अमेरिका इस योजना के दूसरे चरण को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत की वैश्विक साख को सम्मान :
भारत को यह न्योता उसकी वैश्विक साख, संतुलित विदेश नीति और शांति प्रयासों में भूमिका को देखते हुए दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बोर्ड में शामिल देश गाजा की स्थिति पर नजर रखेंगे, मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और संघर्ष रोकने से जुड़े कदमों पर विचार करेंगे। हालांकि, इस प्रस्ताव पर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिकिया नहीं आई है। ऐसे में यदि भारत इस पहल में शामिल होता है, तो यह पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया में उसकी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
क्या है बोर्ड ऑफ पीस ?
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों की सूची जारी की। यह बोर्ड गाजा में शांतिए स्थिरताए पुनर्निर्माण और लंबे समय तक विकास की निगरानी करेगा। इस बोर्ड के चेयरमैन खुद डोनाल्ड ट्रंप होंगे। व्हाइट हाउस के अनुसारए बोर्ड में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं, जिनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, इसके अलावा, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल थवाड़ी को भी गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल किया गया है।
इजराइल पीस बोर्ड से नाराज :
नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। जानकारी के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फियद को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
पाक को भी न्योता :
पाकिस्तान ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को राष्ट्रपति ट्रम्प ने गाजा के लिए बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की कि पाकिस्तान को औपचारिक रूप से यह निमंत्रण मिला है। ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में हिस्सा लेता रहेगा और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी समाधान चाहता है।
परमानेंट सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे :
ट्रम्प की प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस में सदस्यता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने रिपोर्ट किया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि देशों को परमानेंट सदस्यता पाने के लिए पहले साल में 1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देनी होगी। ट्रम्प तय करेंगे कि किस देश को सदस्य बनने का निमंत्रण मिलेगा। सामान्य सदस्यता 3 साल की होगी, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकता है।

Comment List