अमेरिका की चांद की ओर ऐतिहासिक उड़ान : 54 साल बाद इतिहास की दहलीज पर नासा, आर्टेमिस-II मिशन के पहले 48 घंटे सबसे अहम, पढ़ें सब कुछ
नया इतिहास: नासा का 'आर्टेमिस II' मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च
अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग में नासा ने आर्टेमिस II मिशन लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा की ओर रवाना हुआ। शक्तिशाली Space Launch System रॉकेट ने इस ऐतिहासिक उड़ान को संभव बनाया, जो भविष्य में मानव को दोबारा चांद पर भेजने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।
अमेरिका। नासा के लिए गुरूवार का दिन सबसे खास रहा क्योंकि अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की शुरुआत करते हुए NASA ने Artemis II mission सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि यह मिशन भविष्य में मानव को चंद्रमा पर दोबारा भेजने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मिशन में पहली बार चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर Orion spacecraft चंद्रमा की दिशा में रवाना हुआ है। प्रक्षेपण के बाद रॉकेट का पहला चरण ओरियन से सफलतापूर्वक अलग हो गया है तथा ओरियन पृथ्वी की कक्षा में भी स्थापित हो गया है। वह पृथ्वी की कक्षा में 24 घंटे तक चक्कर लगाने के बाद आगे की यात्रा के लिए निकलेगा।
यह आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत नासा का पहला मानवयुक्त मिशन है। चार सदस्यीय दल में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं। साथ ही कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन भी दल का हिस्सा हैं। आर्टेमिस मिशन की योजना तीन चरणों में बनाई गई है। बिना चालक दल वाली पहली उड़ान 2022 के अंत में हुई थी। दूसरे चरण में चालक दल के साथ चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरी जाएगी, जिसके बाद तीसरे चरण में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारा जाएगा। नासा ने जानकारी देते हुए बताया कि लॉन्च के शुरुआती आठ मिनट बेहद चुनौतीपूर्ण रहे, जब रॉकेट के बूस्टर्स और कोर स्टेज ने मिलकर यान को पृथ्वी के वातावरण से बाहर पहुंचाया। जिसके बाद ओरियन कैप्सूल को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया और यहीं से इस मिशन का असली परीक्षण शुरू होता है। शक्तिशाली Space Launch System रॉकेट ने इस ऐतिहासिक उड़ान को संभव बनाया, जिसे अपोलो युग के बाद सबसे ताकतवर माना जा रहा है।
नासा ने बताया कि लॉन्च के पहले 48 घंटों में अंतरिक्ष यात्री कई महत्वपूर्ण परीक्षण करेंगे। इसमें ‘प्रॉक्सिमिटी ऑपरेशन्स’ शामिल है, जिसके तहत यान को बेहद सटीकता के साथ एक निष्क्रिय रॉकेट स्टेज के पास ले जाया जाएगा। यह प्रक्रिया भविष्य में चंद्रमा के पास अन्य स्पेसक्राफ्ट के साथ डॉकिंग के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है। मिशन के पहले दिन अंतरिक्ष यात्री सभी सिस्टम की जांच करेंगे और लाइफ सपोर्ट सिस्टम का 24 घंटे का परीक्षण शुरू करेंगे। वहीं, दूसरे दिन का सबसे बड़ा चरण ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन’ होगा, जिसमें यान को इतनी गति दी जाएगी कि वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलकर चंद्रमा की ओर बढ़ सके। करीब छह मिनट की इस इंजन फायरिंग के बाद ओरियन चंद्रमा की यात्रा पर पूरी तरह अग्रसर हो जाएगा। इसके साथ ही अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लाइव संवाद भी स्थापित करेंगे। आने वाले दिनों में इस मिशन को चंद्रमा के पास से गुजरने, संचार ब्लैकआउट और रिकॉर्ड दूरी तय करने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना होगा।
चंद्रमा के चारों ओर से घमूने वाला यह मिशन 50 से अधिक वर्षों में नासा का पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन है। यह 10 दिवसीय मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को ओरियन अंतरिक्ष यान में चंद्रमा के चारों ओर भेजेगा। यह मनुष्यों द्वारा अब तक की गई सबसे लंबी अंतरिक्ष यात्रा होगी। दल चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से से लगभग 7,400 किलोमीटर आगे तक यात्रा करेगा और फिर पृथ्वी पर लौटेगा।

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