बिना विधायक बने कितने दिन रह सकते हैं मंत्री, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
सरकार बदलने के बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो गया
नई दिल्ली। बिना विधायक या विधान परिषद का सदस्य बने 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर क्या कोई व्यक्ति बना रह सकता है। यह महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न अब सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामला संविधान के अनुच्छेद 164(4) की व्याख्या से जुड़ा है। अदालत ने जानना चाहा कि क्या 6 महीने की संवैधानिक छूट का लाभ अलग-अलग कार्यकाल में लेकर कोई व्यक्ति निर्वाचित हुए बिना लंबे समय तक मंत्री रह सकता है।
याचिका के अनुसार, दीपक प्रकाश पहले कार्यकाल में करीब चार महीने 26 दिन तक मंत्री रहे, लेकिन इस दौरान वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बने। सरकार बदलने के बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। करीब 22 दिन बाद नई सरकार के गठन पर उन्हें फिर से मंत्री पद की शपथ दिला दी गई, जबकि तब भी वे निर्वाचित नहीं थे।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि दोनों कार्यकाल की अवधि जोड़ने पर छह महीने की संवैधानिक सीमा पार हो जाती है, जो संविधान की मूल भावना के विपरीत है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में ऐसे सभी मामलों के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक मिसाल बन सकता है।

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