जलकुंभी की चपेट में राणा प्रताप सागर बांध, फ्लोटर पंप और टरबाइनों पर बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों ने समय रहते विशेष सफाई अभियान चलाने की जरूरत बताई
रावतभाटा । प्रदेश के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल राणा प्रताप सागर बांध इन दिनों जलकुंभी (वॉटर हाईसिन्थ) के बढ़ते प्रकोप से जूझ रहा है। कम वर्षा, बरसाती नालों की समय पर सफाई नहीं होने और अपस्ट्रीम क्षेत्रों से बहकर आई जलकुंभी के कारण बांध का बड़ा क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया है। इससे बांध की जल गुणवत्ता, जलीय जीव-जंतुओं के साथ-साथ फ्लोटर पंप, टरबाइन और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर भी खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार जलकुंभी पानी की सतह पर तेजी से फैलने वाला पौधा है, जो पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देता है। इसके कारण मछलियों सहित अन्य जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में मत्स्य प्रजनन काल होने के कारण इसका असर और गंभीर माना जा रहा है। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने उठाई विशेष सफाई अभियान की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बरसात से पहले बरसाती नालों की नियमित सफाई और जलकुंभी हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जलकुंभी की समस्या पर्यावरण, जलीय जैव विविधता और शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
धीमे जल प्रवाह से बढ़ा फैलाव
राणा प्रताप सागर बांध का वर्तमान जलस्तर 1139.34 फीट दर्ज किया गया है। 28 जुलाई 2026 तक राणा प्रताप सागर क्षेत्र में 235.20 मिमी, गांधी सागर में 199.00 मिमी, जवाहर सागर में 250.10 मिमी और कोटा बैराज क्षेत्र में 195.20 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपेक्षाकृत कम वर्षा और जल प्रवाह की धीमी गति के कारण जलकुंभी को फैलने का अनुकूल वातावरण मिला है।
अपस्ट्रीम क्षेत्रों के बरसाती नालों से बहकर जलकुंभी बांध क्षेत्र में पहुंचती है। यदि मानसून से पहले इन नालों की प्रभावी सफाई कर दी जाए तो जलकुंभी की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। जलकुंभी के कारण फ्लोटर पंप और टरबाइनों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे इनके संचालन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- आशीष जैन, अधिशासी अभियंता, राणा प्रताप सागर बांध
जलकुंभी के कारण फ्लोटर पंपों के संचालन में परेशानी आती है। इससे पेयजल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। विभाग की ओर से आवश्यकता के अनुसार सफाई और निगरानी की जाती है, ताकि जलापूर्ति व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
- पवन शर्मा, अधिशासी अभियंता,जलदाय विभाग

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