सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर, कहीं टीनशेड के नीचे तो कहीं मंदिर परिसर में चल रहे स्कूल

शिक्षा विभाग की मंशा पर सवाल

सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर, कहीं टीनशेड के नीचे तो कहीं मंदिर परिसर में चल रहे स्कूल
कहीं टीनशेड के नीचे तो कहीं मंदिर परिसर में चल रहे स्कूल, न कक्षा-कक्ष, न ब्लैक बोर्ड और न बैठने की समुचित व्यवस्था।

कोटा। सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और विद्यार्थियों व स्कूल की भौतिक व्यवस्थाओं के फोटो-वीडियो बनाने को लेकर शिक्षा विभाग की सख्ती के बीच ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीरें सामने आर्इं, जो शिक्षा विभाग की मंशा पर सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं, मंदिर परिसर में तो कहीं टीनशेड के नीचे स्कूल चल रहे हैं। किसी स्कूल में ब्लैक बोर्ड तक नहीं है, तो किसी में जर्जर कक्षों पर ताला लगाकर बच्चों को बरामदे व खुले स्थान पर बैठाना पड़ रहा है।

इधर, शिक्षा विभाग का तर्क है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, गरीमा व निजता बनाए रखने के लिए बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश व फोटो-वीडियो बनाने पर रोक लगाई गई है। उधर, ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों की बदहाली, अभावों से जूझते बच्चों की तस्वीरें समाज के बीच न आए, इसलिए विभाग ने यह आदेश जारी किए हैं। कोटा जिले के तीन सरकारी स्कूलों के हालात बेहद चौंकाने वाले मिले हैं, पेश है खबर के प्रमुख अंश....

उदपुरा : मंदिर के आंगन में चल रहा स्कूल
सुल्तानपुर पंचायत समिति के उदपुरा गांव का राजकीय प्राथमिक विद्यालय पिछले करीब डेढ़ माह से ठाकुरजी के मंदिर परिसर में टीनशेड के नीचे संचालित हो रहा है। उदपुरा निवासी उप सरपंच नरेश कुमार ने बताया कि स्कूल भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को यहां शिफ्ट किया गया है। बारिश में टीनशेड के नीचे पढ़ाई ठप हो जाती है। कॉपी-किताबें भीग जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, उदपुरा स्कूल भवन की बिल्डिंग अंदर से जर्जर है। छत की पट्टियां टूटी हुई है। कुछ दिनों पहले पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने स्कूल का सर्वे किया था, जिसमें भवन को असुरक्षित बताते हुए यहां स्कूल संचालित नहीं करने की सलाह दी गई थी। इसके बाद से बच्चों की कक्षाएं मंदिर परिसर में लग रही हैं। ग्रामीण शुभम कुमार कहते हैं, उदपुरा स्कूल कक्षा पांचवीं तक संचालित है। जिसमें कुल 15 बच्चों का नामांकन है।

कोटड़ापुरा : तीन कक्षाएं टीनशेड के नीचे
सुल्तानपुर पंचायत समिति के कोटड़ापुरा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां कक्षा छह, सात और आठवीं के बच्चों की कक्षाएं टीनशेड के नीचे संचालित खुले में टीनशेड के नीचे चलती है। बच्चों के लिए नियमित कक्षा-कक्ष उपलब्ध नहीं होने के साथ पढ़ाई के लिए ब्लैक बोर्ड तक की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, दीवार पर वैकल्पिक ब्लैक बोर्ड बनाया गया था, लेकिन दीवार का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ने के कारण वह भी क्षतिग्रस्त हो गया। ऐसे में टीनशेड के नीचे पढ़ने वाले बच्चों को बुनियादी शैक्षणिक सुविधा तक नहीं मिल पा रही है।

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प्राध्यापक कक्ष में चलती तीन कक्षाएं
स्कूल में केवल दो छोटे कमरे हैं। इनमें से एक को मतदान केंद्र के रूप में उपयोग किया जाता है। जिसमें पोषाहार बनाया जाता है और खाद्य सामग्री भी रखी जाती है। दूसरा कमरा प्राध्यापक का है। जिसमें एक साथ तीन कक्षाएं-कक्षा पहली, दूसरी और तीसरी संचालित होती हैं। ऐसे में शेष कक्षाओं के बच्चों को खुले में बैठना पड़ता है।

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70 बच्चे, पांच शिक्षक
कोटड़ापुरा स्कूल में करीब 70 बच्चों का नामांकन और पांच शिक्षक हैं।

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सोहनपुरा : प्लास्टर गिरा, बाल-बाल बचे बच्चे
मंडाना क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सोहनपुरा में मंगलवार को कक्षा-कक्ष की छत का प्लास्टर गिर गया था। गनीमत रही कि उस समय बच्चों की छुट्टी हो चुकी थी। स्कूल में कुल तीन कक्षा-कक्ष हैं। इनमें से दो कक्ष जर्जर होने के कारण बंद हैं। इसके चलते बच्चों को बरामदे और खुले स्थान में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। कक्षा एक से आठवीं तक संचालित इस स्कूल में करीब 65 बच्चों का नामांकन है।

बदहाली की तस्वीरें सामने आना जरूरी या रोक?
स्थानीय निवासी एडवोकेट शिव प्रकाश का कहना है, शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसरों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश और विद्यार्थियों तथा भौतिक संसाधनों के फोटो-वीडियो बनाने को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों में यह सवाल उठ रहा है कि स्कूल की कमियां सामने नहीं आएगी तो सुधार कैसे होगा। सवाल यह नहीं कि तस्वीर कौन ले रहा है, सवाल यह है कि स्कूल की हालत ऐसी क्यों है?, उदपुरा, कोटड़ापुरा और सोहनपुरा के हालात यही सवाल सामने रखते हैं कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर स्कूल भवन कब मिलेंगे?

इनका कहना है
ऐसा नहीं है, बच्चों की सुरक्षा, निजता व गरीमा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रिंसिपल की अनुमति के बिना वीडियो-फोटो नहीं लिए जा सकते।
-अनिल पोरवाल, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी

विद्यालय में किसी के आने-जाने पर व फोटो-वीडियो बनाने पर हमने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। लेकिन, बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा हमारा है। हमारे यहां कुछ भी छिपा नहीं है। किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के स्कूल में घुस आने से बच्चों की निजता बाधित होती है।
-मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री

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