हाड़ौती का ‘मिनी गोवा’ बेजार, बारिश की आस में पिकनिक स्पॉट
बरधा डेम में 21 फीट की क्षमता के मुकाबले महज 13 फीट पानी
कोटा । हाड़ौती अंचल में इस बार मानसून की रफ्तार धीमी रहने और इंद्रदेव की मेहरबानी न होने से कोटा और आसपास के प्रसिद्ध लोकल पिकनिक स्थल वीरान नजर आ रहे हैं। जिन पर्यटन स्थलों पर अगस्त के इन दिनों में सैलानियों का जमावड़ा रहता था और पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती थी, वे स्थल अब पर्यटकों की राह तक रहे हैं । जिन रास्तों और चट्टानों पर कभी सैलानियों की आवाजाही से रौनक बनी रहती थी, वहाँ अब सन्नाटा पसरा है। कर्णेश्वर महादेव के शांत परिसर से लेकर आलनिया के प्रागैतिहासिक शैलचित्रों वाले क्षेत्र तक, मानसून का वह जादुई अहसास गायब है जो हर साल हजारों लोगों को अपनी ओर खींच लाता था। स्थानीय लोगों से लेकर दूर से आने वाले पर्यटकों तक, हर किसी की निगाहें अब केवल आसमान की ओर हैं कि मेघ मेहरबान हों तों ये खूबसूरत ठिकाने फिर से खिल उठें।
बरधा डेम : 'मिनी गोवा' में छाया सन्नाटा
सवा सौ साल पुराना बरधा बांध, जिसे 'हाड़ौती का मिनी गोवा' भी कहा जाता है, इस समय पानी की आवक कम होने से खाली पड़ा है। ब्रिटिश गवर्नर रॉबर्टसन द्वारा निर्मित 21 फीट भराव क्षमता वाले इस बांध पर सामान्य दिनों में अब तक पानी की चादर (ओवरफ्लो) चलने लगती थी। कोटा से मात्र 25 किलोमीटर की दुरी पर होने के कारण यहां हर वर्ष यहाँ वीकेंड पर हजारों लोगों का आना रहता है। पिछले साल इन दिनो यहां रोजाना हजारों लोग पहुंच रहे थे जबकि विकेण्ड पर यहां 5 हजार से अधिक पर्यटक जलक्रीड़ा करते नजर आये थे।
16 फीट के उपर मुसलाधार बारिश जरूरी
21 फीट भराव क्षमता वाले इस बांध में अभी केवल 13 फीट ही पानी भरा है। स्थानीय निवासीयों ने बताय कि इसे 17 फीट से ज्यादा भरने के लिए मुसलाधार बारिश की जरूरत रहती है।
धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों पर भी कम रौनक
कर्णेश्वर महादेव: अपनी प्राचीनता, दिव्यता और मानसूनी हरियाली के लिए मशहूर कर्णेश्वर महादेव मंदिर में आध्यात्मिक शांति तो है, लेकिन बारिश के अभाव में यहां बहने वाले प्राकृतिक झरना और हरियाली में वैसी रंगत नजर नहीं आ रही है। यहां के प्राकृतिक बहाव के उपर बनाए गए एनीकट के उपर से बहता पानी लोगो के लिए वाटर फाल का आनन्द देता है। कोटा के समीप व होने के कारण यहां पर इन दिनों खासी भीड़ रहती थी। यहां पास ही बसी बस्ती के लोगों के लिए भी अस्थाई रोजगार का साधन बन जाता है। ऐसे में क्षेत्र के लोग और ठेले के उपर व्यापार करने वाले स्थानीय लोग अब केवल तेज बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि नदियां-बांध लबालब हों और हाड़ौती के ये खूबसूरत मुकाम फिर से गुलजार हो सकें।
चट्टानेश्वर महादेव आलनिया
आलनिया बांध के पास पहाड़ों के बीच स्थित यह स्थल अपने 3600 साल पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और मानसूनी झरनों के लिए जाना जाता है। बारिश न होने के कारण यहाँ भी सैलानियों की आवाजाही थम सी गई है। आलनिया डेम में पानी की आवक नही होने से यहां बहने वाला पानी अभी बंद है। ऐसे में पिकनिक स्पॉट पर जलक्रीड़ा का आनंद लेने वाले लोग अच्छे मानसून होने का इंतजार कर रहे है। महावीर नगर निवासी गोविन्द बताते है कि अगस्त के पहले तक तो हर बार दो तीन बार बाहर पिकनीक हो जाती थी इस बार बाहर जाने की तो हिम्मत ही नहीं हो रही।
मौसम की बेरुखी और खाली पड़े पिकनिक स्पॉट
आषाढ़ बीतकर सावन का महीना आधा ढल चुका है, लेकिन कोटा और आसपास के इलाकों में बदरा झूमकर नहीं बरसे। आसमान में घुमड़ते काले बादलों को देख चेहरे खिलते तो हैं, लेकिन बिन बरसे गुजर जाने से आस टूट जाती है। मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर स्थानीय पर्यटन पर पड़ा है। बरधा बांध की पथरीली चट्टानों से लेकर चट्टानेश्वर के प्राकृतिक झरनों तक—जहाँ पानी की छलांग और कलकल बहती धाराएं देखने को मिलती थीं, वहाँ अब सिर्फ सन्नाटा पसरा हुआ है।
पिछले साल मनाई थी पिकनिक इस बार मायूसी
वीकेंड पर दूर-दराज और शहर से आने वाले सैलानी जब पूरे उत्साह के साथ पिकनिक मनाने पहुँचते हैं, तो पानी न मिलने पर उनकी उम्मीदें अधूरी रह जाती हैं। कर्नेश्वर पहुंचे श्रीनाथपुरम-सी निवासी रविन्द्र बताते है कि पिछले साल पुरे परिवार के साथ यहां जमकर पिकनिक मनाई थी आज यहां आया तो मन में मायूसी आई है। साथ आई पुजा ने बताया कि गर्मी के कारण केवल भोलेनाथ के दर्शन करके वापस जा रहे है। जो पानी में उतरकर नहाने और मस्ती करने का मन बनाकर आते हैं, सूखे पड़े कुंड और खाली बांध देखकर मायूस हो जाते हैं। हरियाली और छांव के अभाव में सैलानियों को मानसून के मौसम में भी गर्मी और उमस से दो-चार होना पड़ रहा है।
यहां स्थित प्राचीन कुण्ड़ लगभग खाली ही पड़ा है आस-पास से चलने वाले सारे झरने पूरी तरह सुखे है। सावन के महीने में बाबा कनेश्वर के दर्शन करने वाले भक्तों की अपार भीड़ इस बार नदारद है हांलाकि बाबा के लिए सोमवार को फिर भी भक्त आ रहे है लकिन पहले वाला माहौल नही बन पा रहा।
-ब्रजेश आसोपा,सेवादार समिति कर्णेश्वर महादेव मंदिर
इस बार बरधा बांध में पानी की आवक ज्यादा नहीं होने के कारण यहां पर पर्यटकों का आना न के बराबर है। पिछले साल यहां इन दिनों सैकडों गाडियां प्रतिदिन आया करती थी। यहां का सड़क केवल 15 फीट की हाेने के कारण यातायात व सुरक्षा के लिए तालेडा थाने से अतिरिक्त जाप्ता लगाना पड़ता था। अभी केवल सामान्य गस्त से ही काम हो रहा है। आसपास के ग्रामीणाे को छोटा-मोटा रोजगार मिलने के कारण उनमें भी पर्यटकों के प्रति रूझान रहता है।
-राजेश रायपुरिया प्रधान तालेडा
बरसात की स्थितियों को देखते हुए सभी संभावित स्थनों पर अतिरिक्त जाप्ता लगाया जाता है। डूब क्षेत्रों में सभी थाना क्षेत्रों में हमारी गाडियां रूटीन गस्त कर रही है। हांलाकि अभी तक किसी भी पिकनिक स्थल पर भारी भीड नहीं जुटने के कारण अलग से जाप्ता नहीं लगाया गया है ।
-मनीष शर्मा वृत्ताधिकारी चतुर्थ कोटा पुलिस

Comment List