बच्चों का फिर शोषणकारी मजदूरी में लौटना चिंताजनक : इस बुराई के उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत, खड़गे बोले- बच्चों को शोषण से बचाने की जिम्मेदारी सबकी
बाल श्रम केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर कहा है कि हाल के वर्षों में यह चिंताजनक स्थिति देखने में आयी है कि बच्चों को फिर शोषणकारी मजदूरी की तरफ धकेला जा रहा है और इस बुराई के उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों की सख्त जरूरत है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बच्चों को शोषण से बचाने की जिम्मेदारी सबकी है। उन्होंने इसके लिए सामूहिक कदम उठाने का आह्वान किया और कहा कि प्रत्येक बच्चे के सीखने, बढ़ने और बेहतर भविष्य के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। खड़गे ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और शोषणमुक्त बचपन का अधिकार है। बाल श्रम केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय है, जो बच्चों से उनका भविष्य छीन लेता है।
उन्होंने कहा कि 1986 में बने बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम ने देश में बाल श्रम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बच्चों की पोषण संबंधी स्थिति पर भी चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के अनुसार 29.3 प्रतिशत बच्चे अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) और 31.8 प्रतिशत कम वजन प्रभावित हैं, जो देश में पोषण संबंधी चुनौतियों को दर्शाता है। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण भारत में कक्षा छह के 42 प्रतिशत, कक्षा सात के 36 प्रतिशत और कक्षा आठ के 29 प्रतिशत छात्र दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम नहीं हैं। इसी प्रकार कक्षा छह के 64 प्रतिशत, कक्षा सात के 59 प्रतिशत और कक्षा आठ के 54 प्रतिशत छात्र साधारण गुणा-भाग का सवाल हल नहीं कर पाते हैं, जो सीखने के परिणामों में गंभीर कमी को दर्शाता है।
खड़गे ने कहा कि केवल आर्थिक विकास ही करोड़ों परिवारों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए पर्याप्त और समावेशी साबित नहीं हुआ है और इसीलिए अनेक परिवारों के बच्चे स्कूल जाने के बजाय काम करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि बाल श्रम को जड़ से समाप्त करने तथा प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प और सतत प्रयास किये जाने चाहिए।

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