भाजपा प्रदेश कार्यालय में बिजली गुल मामला : घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश, ऊर्जा मंत्री ने दी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी
अतिरिक्त मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय जांच समिति गठित
जयपुर। भाजपा प्रदेश कार्यालय में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मीडिया संवाद के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटना को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश देते हुए दोषी अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम और जयपुर डिस्कॉम के अधिकारियों के अनुसार, 11 जून को शाम 3:57 बजे 400 केवी जीएसएस पर 220 केवी केटीपीएस लाइन के सर्किट ब्रेकर में एसएफ-6 गैस लीकेज की मरम्मत के दौरान आइसोलेटर संचालित किया जा रहा था।
इसी दौरान करंट असंतुलन के कारण 250 एमवीए क्षमता के 2 ट्रांसफार्मर ट्रिप हो गए, जिससे एनपीएच, चंबल, वैशाली नगर, भांकरोटा और पीडब्ल्यूडी बंगला सहित कई क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। अधिकारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था से 10 से 17 मिनट में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी, जबकि दोनों ट्रांसफार्मरों को शाम 4:21 बजे दोबारा सुचारु रूप से चालू कर दिया गया। ऊर्जा मंत्री ने अतिरिक्त मुख्य अभियंता (एमपीटी एंड एस) जयपुर की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो घटना के कारणों की पड़ताल कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपाय सुझाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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