सुरक्षा का सफर प्रहरी पैनिक में : राजस्थान रोडवेज के पैनिक बटन फेल, रामभरोसे यात्री

टेंडर खत्म होने से सीसीटीवी बंद

सुरक्षा का सफर प्रहरी पैनिक में : राजस्थान रोडवेज के पैनिक बटन फेल, रामभरोसे यात्री
निर्भया फंड से करोड़ों खर्च पर धरातल शून्य,बसों में सीसीटीवी के तार कटे और फर्स्ट एड बॉक्स खाली।

कोटा। जिस दिल्ली के निर्भया कांड की तर्ज पर महिला सुरक्षा के लिए रोडवेज बसों में शुरू की गई 'पैनिक बटन' योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। दैनिक नवज्योति की विशेष रिपोर्ट और आधिकारिक आंकड़ों में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिन उपकरणों को यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी माना गया था, वे या तो तकनीकी लापरवाही की भेंट चढ़ चुके हैं या पूरी तरह बंद पड़े हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में कुल 50 गाड़ियों (2017 और उसके बाद के मॉडल) में पैनिक बटन लगे हैं, जबकि पुरानी कंडम श्रेणी की गाड़ियों में यह सुविधा ही नहीं है। अनुबंधित 18 गाड़ियों को मिलाकर यह संख्या 68 होती है। विभाग का दावा है कि इनमें से केवल 39 विभागीय और 14 अनुबंधित बसों में पैनिक बटन चालू स्थिति में हैं, जिनकी रिपोर्ट हर दो-तीन दिन में ऐप के जरिए मुख्यालय भेजी जाती है। धरातल पर वास्तविकता यह है कि अमूमन केवल 36 से 40 बसों में ही यह सिस्टम ऑन रहता है।

बटन दबाया पर नहीं आया कोई रिस्पॉन्स, स्टाफ काट देता है वायर
पड़ताल में सामने आया कि पैनिक बटन का डिवाइस स्टीयरिंग के पास होने से कई बार गाड़ी स्टार्ट न होने या लाइट की समस्या आने पर ड्राइवर खुद ही वहां के वायर को छेड़कर सिस्टम बंद कर देते हैं। बूंदी डिपो की चित्तौड़गढ़ जाने वाली बस के स्टाफ ने बेफिक्री से कहा— लोग बार-बार बटन दबा देते थे और हमारे पास हेड ऑफिस से फोन आने लगते थे, इसलिए हमने इसे बंद ही कर दिया।

फर्स्ट एड बॉक्स के लिए नई नोटशीट
आपातकालीन स्थिति के लिए रखे गए फर्स्ट एड बॉक्स गायब या टूटे होने से खाली पड़े हैं। अब इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए विभाग ने एक नई नोटशीट चलाई है, जिसके तहत प्राथमिक उपचार किट को सीधे कंडक्टर के पास सुरक्षित रखवाया जाएगा।

अग्निशामक यंत्र भी नदारद
करीब 45 बसों में आग बुझाने वाले अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) तक गायब मिले। ग्रामीण रूट की बसों के हालात तो और भी बदतर हैं, जहां तकनीकी सुविधाएं तो दूर, फटी सीटों के नीचे का फर्श तक टूटा हुआ नजर आया। राहत की बात केवल इतनी है कि जयपुर और मध्य प्रदेश (एमपी) रूट पर चालान की सख्ती को देखते हुए हाल ही में खरीदे गए नए फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) लगभग सभी गाड़ियों में रखवाए गए हैं। हालांकि, ग्रामीण रूटों पर चलने वाली अनुबंधित और पुरानी बसों में ये व्यवस्थाएं अब भी बदहाल हैं।

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टेंडर खत्म होने से सीसीटीवी बंद
बसों में लगे सीसीटीवी कैमरों और स्क्रीन्स का टेंडर खत्म हो चुका है, जिसके चलते वर्तमान में ये पूरी तरह बंद पड़े हैं। बसों में लगे सीसीटीवी कैमरों और स्क्रीन्स के टेंडर खत्म होने से उनके कनेक्शन काट दिए गए हैं।

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अच्छा, हमें तो पता ही नहीं था कि यह बटन इतने काम का है!
नयापुरा बस स्टैंड पर जब टीम ने महिला यात्रियों से बात की, तो अधिकांश ने इस सुरक्षा तकनीक के बारे में अनभिज्ञता जताई। 18 यात्रियों (8 महिलाएं, 10 पुरुष) में से केवल 2 को ही इसकी जानकारी थी। यात्री नितिन नांता और गोविंद सिंह गौड़ ने कहा कि इस सुरक्षात्मक तकनीक के बारे में यात्रियों को जागरूक करने के लिए रोडवेज टिकट पर पैनिक बटन के इस्तेमाल का उल्लेख होना चाहिए। साथ ही, हिंडोली की यात्रा कर रहे धर्मराज गौड़ ने बताया कि कई बसों में यह बटन सामान रखने वाले रैक (लगेज रैक) के नीचे छिपा होता है, जिससे यह दिखाई ही नहीं देता। सभी बसों में यह एक ही तय स्थान पर होना चाहिए।

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टिकट पर मिले जानकारी
गोविन्द सिंह गौड ने बताया कि आम जनता को जागरूक करने के लिए रोडवेज की यात्रा टिकट पर पैनिक बटन की जानकारी का उल्लेख होना चाहिए। साथ ही टिकट चेकर (टीटीई) को सफर के दौरान बुजुर्गों और महिलाओं को इसके इस्तेमाल के बारे में खुद बताना चाहिए।

बूंदी से चित्तौड़ की बस में सफर कर रही गीता ने बताया कि मैने पहले इसके बारे अखबार में पढा यह महिलाओं के लिये तो बहुत ही काम का है साथ ही बुजुर्ग व आपात स्थिति में भी काम का है हालांकि रोडवेज की बसों में यह दिखता तो है लेकिन काम करता है या नहीं इस बारें में नहीं पता। धनराज मीणा ने बताया कि इस तरह की चीजे न केवल सुरक्षा की गारन्टी है बल्कि इनके होने से मानसिक शांति के साथ यात्रा करने का आनन्द भी आता है।

बसों में पैनिक बटन की स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है। हर दो से तीन दिन में इसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जा रही है। वर्तमान में जो तकनीकी खामियां या वायर कटने की समस्याएं सामने आई हैं, उन्हें तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। स्टाफ द्वारा जानबूझकर बटन बंद करने के मामले की जांच करवाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, फर्स्ट एड बॉक्स को अब सीधे कंडक्टर की कस्टडी में सुरक्षित रखने की नई व्यवस्था शुरू की जा रही है ताकि यात्रियों को समय पर प्राथमिक उपचार मिल सके।
- सुचिता गुप्ता, प्रबंध निदेशक (एमडी), राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम 

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