इंदौर में दूषित पानी पीने से बच्चों की मौत पर राज भूषण चौधरी ने कहा, देश के किसी भी क्षेत्र के लोग दूषित पानी पीने के लिए बाध्य नहीं

दूषित पानी को लेकर सरकार का आश्वासन

इंदौर में दूषित पानी पीने से बच्चों की मौत पर राज भूषण चौधरी ने कहा, देश के किसी भी क्षेत्र के लोग दूषित पानी पीने के लिए बाध्य नहीं

सरकार ने राज्यसभा में कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति दूषित पानी पीने को मजबूर नहीं है। जल जीवन मिशन से नल जल पहुंचा, बच्चों की मौतें घटीं।

नई दिल्ली। सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि देश के किसी भी इलाके में लोग दूषित पानी पीने के लिए बाध्य नहीं हैं। राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि केंद्रीय भूजल बोर्ड और राज्य सरकारों की रिपोर्ट के अनुसार देश का भूजल काफी हद तक पीने योग्य है। उन्होंने कहा कि आज 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंच रहा है और देश के किसी भी क्षेत्र का व्यक्ति दूषित पानी पीने के लिए बाध्य नहीं है।

हाल ही में, मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से कई बच्चों की मौत के बारे में पूछे गए एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सदन को बताया कि हर घर जल योजना से 8.4 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है और हर साल 60 हजार बच्चों की मौत रोकी गयी है जो दूषित पानी की वजह से होती थी। उन्होंने कहा कि जलापूर्ति राज्य सरकारों का काम है इसके बावजूद केंद्र सरकार जल जीवन मिशन के तहत उन्हें इसे लागू करने में मदद कर रही है। 

उन्होंने कहा, एक जिले में कभी कोई घटना हो तो उसके अपने कुछ कारण हो सकते हैं। इंदौरा की घटना में की गयी कार्रवाई के बारे में उन्होंने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट आने पर सरकार उचित कार्रवाई करेगी। इसी सवाल के जवाब से पहले उन्होंने स्पष्ट किया कि इंदौर नहीं सूरत देश का सबसे स्वच्छ शहर है। 

उन्होंने बताया कि पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए 24.8 लाख महिलाओं को विशेष किट दिये गये थे। आठ लाख महिलाओं ने उनके घरों में आने वाले पानी की गुणवत्ता जांच कर रिपोर्ट जल जीवन मिशन के पोर्टल पर अपलोड की है। वित्त वर्ष 2025-26 में जल जीवन मिशन के लिए 67,000 करोड़ रुपये के बजट आवंटन को संशोधित कर 17,000 करोड़ रुपये किये जाने के सवाल पर पाटिल ने कहा कि जिन राज्यों ने मिशन पर किये गये खर्च की पूरी जानकारी नहीं दी उन्हें पैसा जारी नहीं किया गया। यही कारण है कि यह पैसा वापस ले लिया गया। उन्होंने कहा कि जैसे ही राज्य पूरी जानकारी उपलब्ध करा देते हैं उनका पैसा जारी कर दिया जायेगा। वित्त वर्ष 2026-27 में मिशन के लिए 67,300 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। 

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