MNREGA विवाद पर राहुल, प्रियंका गांधी का चौंकाने वाला बयान, कहा-नाम बदलना केंद्र सरकार की सनक

मनरेगा नाम बदलने पर मोदी सरकार पर कांग्रेस का हमला

MNREGA विवाद पर राहुल, प्रियंका गांधी का चौंकाने वाला बयान, कहा-नाम बदलना केंद्र सरकार की सनक

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने मनरेगा का नाम बदलने को सरकार की सनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे गरीबों के रोजगार अधिकार कमजोर होंगे और महात्मा गांधी के विचारों का अपमान किया जा रहा है।

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना(मनरेगा) का नाम बदलना केंद्र सरकार की सनक का परिणाम है और ऐसा कर वह गरीबों के हक मार रही है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा, मनरेगा का नाम बदलने के पीछे की सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार रोजगार के कानूनी अधिकार को खत्म करना चाहती है। इस योजना से देश के गरीब से गरीब मजदूरों को रोजगार की गारंटी मिलती है, लेकिन केंद्र सरकार को योजनाओं के नाम बदलने की सनक है।

उन्होंने कहा कि नाम बदलना इनकी सनक है और हर नाम को वह बदल रही है। सरकार जब भी नाम भी बदलती है तो सरकार का खर्च होता है। महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता हैं और उनके नाम पर मनरेगा कानून में बड़ा बदलाव किया जा रहा है और इस योजना को कमजोर कर खत्म करने की योजना चल रही है। इसमें सिर्फ 125 दिन किए गये हैं लेकिन इसके पैसे लोगों को नहीं मिल रहे हैं। योजना में 90 प्रतिशत केंद्र देता है और सरकार चाहती है कि इसे कम किया जाए और अगर ऐसा होगा तो राज्यों को देना पड़ेगा और इस वजह से उन पर अधिक वित्त का बोझ पड़ जाएगा।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, केंद्र सरकार को दो चीजों से पक्की नफऱत है-महात्मा गांधी के विचारों से और गरीबों के अधिकारों से। मनरेगा, महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज के सपने का जीवंत रूप है-करोड़ों ग्रामीणों की जिंदगी का सहारा है, जो कोविड काल में उनका आर्थिक सुरक्षा कवच भी साबित हुआ। मगर सत्तारूढ़ पार्टी को यह योजना हमेशा खटकती रही और पिछले दस सालों से इसे कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं। आज वो मनरेगा का नामो-निशान मिटाने पर आमादा है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा की बुनियाद तीन मूल विचारों, रोजगार का अधिकार-जो भी काम मांगेगा, उसे काम मिलेगा, गांव को प्रगति कार्य खुद तय करने की स्वतंत्रता तथा केंद्र सरकार मजदूरी का पूरा खर्च और समान की लागत का 75 फीसदी देगी, पर आधारित है। केंद्र सरकार अब इसी मनरेगा को बदलकर सारी ताकत सिर्फ अपने हाथों में केंद्रित कर, बजट, योजनाएं और नियम केंद्र तय करेगा, राज्यों को 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जाएगा तथा बजट खत्म होते ही या फसल कटाई के मौसम में दो महीने तक किसी को काम नहीं मिलेगा की नीति पर चल रहे हैं।

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राहुल गांधी ने कहा कि यह नया विधेयक महात्मा गांधी के आदर्शों का अपमान है। केंद्र सरकार ने पहले ही भयंकर बेरोजगारी से भारत के युवाओं का भविष्य तबाह कर दिया है और अब यह विधेयक लाकर उसने उस योजना को भी खत्म कर दिया है जो ग्रामीण गरीबों की सुरक्षित रोजी-रोटी को भी खत्म करने का जरिया है। उन्होंने कहा कि कांगेस इस जनविरोधी विधेयक का गांव की गलियों से संसद तक विरोध करेगी।

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