राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: कांग्रेस ने केंद्र से मांगा जवाब, न्यायिक जांच और फोरेंसिक ऑडिट और ट्रस्ट भंग करने की उठाई मांग

कांग्रेस ने की न्यायिक जांच की मांग

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: कांग्रेस ने केंद्र से मांगा जवाब, न्यायिक जांच और फोरेंसिक ऑडिट और ट्रस्ट भंग करने की उठाई मांग
कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और ₹123 करोड़ से अधिक के भारी खर्च के आरोपों पर केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था आहत हुई है। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करने, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने और मंदिर के सभी वित्तीय लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है।

नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के कारण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा आघात पहुंचा है इसलिए केंद्र सरकार को इस मामले में देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव तथा प्रदेश कांग्रेस महासचिव अनिल भारद्वाज ने शनिवार को यहां दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय लीपापोती की जा रही है। उनका कहना था कि सामान्यतः ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज होती है लेकिन यहां सीधे एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी गठित होने से पहले ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के खिलाफ न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही उन्हें जांच के दायरे में लाया गया जबकि कार्रवाई केवल निचले स्तर के लोगों तक सीमित रखी गई है।

पार्टी नेताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट पर अनाप शनाप खर्च करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि मनमाने तरीके से छोटे छोटे कार्यक्रमों पर पैसा खर्च किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 22 जनवरी 2024 के कार्यक्रम पर 113 करोड़ रुपये और एक अन्य कार्यक्रम पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च दिखाया गया है। उनका कहना था कि राम भक्तों के दान का दुरुपयोग किया गया है, जिससे ट्रस्ट की साख और करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुंची है। उन्होंने पूरे मामले की व्यापक एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

कांग्रेस ने मांग की है कि केंद्र सरकार प्रेस कांफ्रेंस कर देश के सामने स्थिति स्पष्ट करें। पार्टी ने पूरे मामले की न्यायिक जांच उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश से कराने, मंदिर ट्रस्ट को भंग करने, मंदिर में हुए हर लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की भी मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनसे समुचित पूछताछ किए बिना सीधे जेल भेज दिया गया। उनका कहना था कि यदि विस्तृत पूछताछ होती तो मामले में बड़े लोगों के नाम सामने आ सकते थे।

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