शोधकर्ताओं ने दिल के दौरे लिए मकड़ी के जहर से बनी दवा का परीक्षण किया शुरू, जानें पूरा मामला 

नैदानिक परीक्षण सुरक्षित और प्रभावी 

शोधकर्ताओं ने दिल के दौरे लिए मकड़ी के जहर से बनी दवा का परीक्षण किया शुरू, जानें पूरा मामला 

ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने फनल-वेब मकड़ी के जहर से बनी दवा आईबी409 का दिल के दौरे और स्ट्रोक मरीजों पर फेज-1 नैदानिक परीक्षण शुरू किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के अनुसार यह दवा ऑक्सीजन की कमी से होने वाले हृदय और मस्तिष्क नुकसान को कम कर सकती है। सफल होने पर यह हृदय रोग उपचार में बड़ी उपलब्धि होगी।

सिडनी। ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने दुनिया की सबसे खतरनाक मकड़ियों में से एक के जहर से तैयार दवा का दिल के दौरे और स्ट्रोक मरीजों पर नैदानिक परीक्षण शुरू किया है। शोधकर्ताओं ने यह जानकारी दी। ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड (यूक्यू) के एक बयान के अनुसार, फेज 1 क्लीनिकल ट्रायल के दौरान आईबी409 नामक दवा की सुरक्षा, सहनशीलता और इसकी सही खुराक का परीक्षण किया जायेगा। यह एक नयी दवा है। इसे बायोटेक्नोलॉजी कंपनी इन्फेंसा बायोसाइंस ने ऑस्ट्रेलियाई फनल-वेब मकड़ी के जहर में पाए जाने वाले अणु से विकसित किया है। यूक्यू के इंस्टीट्यूट फॉर मॉलिक्यूलर बायोसाइंस के प्रोफेसर ग्लेन किंग ने कहा कि उनकी टीम ने एचआई1ए के साथ बेदह आशाजनक प्री-क्लीनिकल परिणाम प्रकाशित किए हैं। एचआई1ए क्वींसलैंड राज्य के फ्रेजर द्वीप पर पाई जाने वाली फनल-वेब मकड़ी के जहर से प्राप्त प्रोटीन है।  

नैदानिक परीक्षण सुरक्षित और प्रभावी :

किंग ने कहा कि हमारा मानना है कि ऑक्सीजन की कमी से होने वाली कोशिकाओं की मौत को रोककर एचआई1ए दिल के दौरे और स्ट्रोक के दौरान हृदय और मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को कम कर सकता है। उनकी टीम ने यह साबित कर किया है कि एचआई1ए प्रभावी ढंग से दिल की रक्षा करता है। इसके बाद एक अन्य अध्ययन में इसका प्री-क्लीनिकल परीक्षण किया गया, जिसमें इलाज के उन वास्तविक हालातों को दोहराया गया, जो असल जिंदगी में मरीजों के सामने आते हैं। इन्फेंसा के सीईओ और यूक्यू के शोधकर्ता प्रोफेसर मार्क स्मिथ ने कहा, यदि आईबी409 के पहले चरण और बाद के नैदानिक परीक्षण सुरक्षित और प्रभावी साबित होते हैं तो हम दुनिया भर में हृदय रोग से पीड़ित लाखों लोगों का जीवन सुधार सकते हैं। इन्फेंसा की टीम ने एचआई1ए को आईबी409 में बदल दिया है। यह एक सूक्ष्म पेप्टाइड है, जिसे दवा के रूप में विकसित करने के लिए तैयार किया गया है। प्रोफेसर स्मिथ ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में ऐसी कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है, जो दिल के दौरे और स्ट्रोक से होने वाले नुकसान को रोक सके।

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