सीजीएचएस नियमों में सख्ती: मोटापा एवं डायबिटीज की दवाओं के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी, जानें क्या है शर्ते ?

इन लोगों को नहीं मिलेगा लाभ

सीजीएचएस नियमों में सख्ती: मोटापा एवं डायबिटीज की दवाओं के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी, जानें क्या है शर्ते ?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत टिरज़ेपेटाइड और सेमाग्लूटाइड जैसी मोटापा एवं टाइप-2 मधुमेह रोधी दवाओं के उपयोग पर कड़े नियम लागू किए हैं। ये इंजेक्शन केवल उच्च बीएमआई और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे पात्र लाभार्थियों को विशेषज्ञों की अनुमति के बाद ही दिए जाएंगे।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत मोटापा और टाइप-2 मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट इंजेक्शन दवाओं के इस्तेमाल के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इन दवाओं की समीक्षा के बाद टिरज़ेपेटाइड (माउनजारो) को सीजीएचएस की प्रतिबंधित दवाओं की ऑनलाइन सूची में शामिल कर दिया है। अब माउनजारो और सेमाग्लूटाइड का उपयोग केवल तय शर्तों के अनुसार ही किया जा सकेगा।

नए नियमों के अनुसार, ये इंजेक्शन केवल उन सीजीएचएस और केंद्रीय सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 1944 के पात्र लाभार्थियों को दिए जा सकेंगे, जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 35 या उससे अधिक हो। इसके अलावा 32.5 या उससे अधिक बीएमआई वाले ऐसे मरीज भी इसके पात्र होंगे जिन्हें अनियंत्रित टाइप-2 मधुमेह, गंभीर स्लीप एपनिया, हृदय रोग, फैटी लीवर की गंभीर बीमारी या किडनी की पुरानी बीमारी जैसी समस्याएं हों। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मरीजों को पहले पैंक्रियाटाइटिस हो चुका हो, थायरॉयड कैंसर का व्यक्तिगत या पारिवारिक इतिहास हो, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं हों, गंभीर डायबिटिक रेटिनोपैथी, पेट की गंभीर बीमारी या बैरिएट्रिक सर्जरी का इतिहास हो, उन्हें ये दवाएं नहीं दी जाएंगी।

दवा शुरू करने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर को यह प्रमाणित करना होगा कि मरीज ने कम से कम तीन महीने तक जीवनशैली में बदलाव, खान-पान संबंधी परामर्श और नियमित शारीरिक गतिविधि का पालन किया है। इन दवाओं का पर्चा केवल सरकारी अस्पताल के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या आंतरिक रोग विशेषज्ञ ही लिख सकेंगे। हर पर्चे पर संबंधित विभागाध्यक्ष की मंजूरी जरूरी होगी और इसकी वैधता छह महीने तक रहेगी। इसके बाद इलाज जारी रखने के लिए फिर से विशेषज्ञ की सिफारिश और विभागाध्यक्ष की मंजूरी लेनी होगी।

दिशा-निर्देशों के अनुसार इलाज शुरू होने के बाद पहले तीन महीने तक हर महीने और उसके बाद हर तीन महीने में मरीज की जांच होगी। डॉक्टरों को वजन में कमी, इलाज का असर, दवा के दुष्प्रभाव, पैंक्रियाटाइटिस के संकेत, मांसपेशियों में कमी और अन्य दुष्प्रभावों का रिकॉर्ड रखना होगा। इलाज तभी जारी रहेगा जब मरीज को स्पष्ट लाभ मिल रहा हो और दवा सुरक्षित साबित हो। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी सीजीएचएस वेलनेस सेंटरों और संबद्ध अस्पतालों को इन दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि नियमों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

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