राज्यसभा में उठा एसएफआई नेता आइसी घोष की गिरफ्तारी के प्रयास का मुद्दा, विपक्ष ने किया हंगामा
कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी
नई दिल्ली। वाम दलों तथा अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने स्टूडेन्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की संयुक्त सचिव आइसी घोष की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की कोशिश का मामला राज्यसभा में उठाया और इसके चलते हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष के बढते हंगामे के कारण उन्हें कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद राधाकृष्णन ने जैसे ही कार्यवाही शुरू करना चाही, विपक्ष के सदस्यों ने यह मामला उठाना शुरू कर दिया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जान ब्रिटास ने कहा कि सभी दलों की ओर से वह एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा उठाना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि मंगलवार को संसदीय लोकतंत्र में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। दिल्ली पुलिस की टीम ने राष्ट्रीय पार्टी माकपा के मुख्यालय में घुसकर एसएफआई नेता आइसी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश की।
ब्रिटास ने कहा कि वह मौके पर मौजूद थे और गिरफ्तारी का कारण पूछे जाने पर दिल्ली पुलिस ने बताया कि सुश्री घोष छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने जंतर मंतर पर गयी थी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने यह भी बताया कि यह गिरफ्तारी 2021 के जे एन यू परिसर के एक मामले में की जा रही है। उन्होंने कहा कि आपत्ति की बात यह भी है कि दिल्ली पुलिस के लोग बिना वर्दी के मुख्यालय में आये थे उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा डर का माहौल बनाया जा रहा है । उन्होंने मांग की कि गृह मंत्री बतायें कि यह क्या मामला है। नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अभी जो मुद्दा उठाया गया है यह शर्मनाक घटना है। इसमें राष्ट्रीय पार्टी के कार्यालय में घुस कर गिरफ्तार करने की कोशिश की गयी है यह उचित नहीं है और इस मामले में दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।
इस बीच विपक्ष के सदस्यों ने अपनी जगह से उठकर नारेबाजी शुरू कर दी। वह इस मामले में गृह मंत्री से जवाब की मांग कर रहे थे। सभापति ने हंगामे के बीच शून्यकाल की कार्यवाही चलाने की कोशिश की, लेकिन सदन में बढते शोर शराबे को देखते हुए उन्होंने कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। मानसून सत्र का आज 8वां दिन है और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण पिछले सात दिनों के दौरान सदन में कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका है।

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