अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस : बाघों की दहाड़ से गूंज रहा राजस्थान, 149 तक पहुंची बाघों की संख्या
सरिस्का में सर्वाधित 28 शावकों का हुआ जन्म
जयपुर। कभी महज 18-20 बाघों तक सिमट चुके राजस्थान के जंगल आज फिर दहाड़ से गूंज रहे हैं। प्रदेश के पांचों टाइगर रिजर्व रणथम्भौर, सरिस्का, रामगढ़ विषधारी, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और धौलपुर-करौली में बाघ, बाघिन और शावकों की कुल संख्या बढ़कर 149 हो गई है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 135 था।
54 बाघिनों ने 53 शावकों को दिया जन्म
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरुण प्रसाद के अनुसार इस वर्ष प्रदेश के पांचों बाघ अभयारण्यों में 54 बाघिनों ने 53 शावकों को जन्म दिया है, जबकि 2025 में 52 बाघिनों से 43 शावकों का जन्म हुआ था। इस बार सरिस्का टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक 28 शावकों का जन्म दर्ज किया गया। वर्तमान में रणथम्भौर में 72 बाघ (बाघ, बाघिन और शावक) हैं, जबकि पिछले वर्ष यहां इनकी संख्या 66 थी। सरिस्का में इनकी संख्या बढ़कर 56 हो गई है। जो पिछले वर्ष 50 थी। प्रदेश के बाघ अभयारणयों में वयस्क बाघ-बाघिनों की संख्या करीब 96 है। अकेले रणथम्भौर में लगभग 50 वयस्क बाघ-बाघिन और 22 शावक हैं। वहीं मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 4 बाघिन, दो बाघ और एक शावक है।
बाघों की नई आबादी बसाने में निभाई अहम भूमिका
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या जंगलों के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। करीब दो दशक पहले राजस्थान में बाघों का अस्तित्व संकट में था, लेकिन आज राज्य देश के प्रमुख टाइगर लैंडस्केप में शामिल हो चुका है। रणथम्भौर में प्रे-बेस, विकसित घासभूमियां और बेहतर संरक्षण रणनीति को प्रमुख कारण माना जाता है। यहां बाघों का सर्वाइवल रेट लगभग 80 प्रतिशत है। बाघिन मछली (टी-16) की वंश परंपरा ने सरिस्का, मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी जैसे क्षेत्रों में बाघों की नई आबादी बसाने में अहम भूमिका निभाई। रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के डीसीएफ मानस सिंह ने बताया कि यहां पर्यटकों को बाघों की अच्छी साइटिंग होती है।
यहां बाघों के लिए प्रे-बेस की कमी नहीं है।
एक नर बाघ 40-50 वर्ग किमी की होती है आवश्यकता
हालांकि बढ़ती संख्या अब वन विभाग के लिए नई परीक्षा भी बन रही है। लगभग 1,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले रणथम्भौर में बाघों का सक्रिय विचरण करीब 700 वर्ग किलोमीटर तक सीमित है। जबकि इसकी क्षमता 40-50 बाघों की मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार एक वयस्क नर बाघ को 40-50 वर्ग किलोमीटर और बाघिन को लगभग 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है। ऐसे में युवा बाघ नए क्षेत्र की तलाश में अन्य जंगलों और मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं।

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