संसद में हंगामे के बीच दो अहम विधेयक पारित: NCDC का दायरा बढ़ेगा, केरल का नाम बदलकर ‘केरलम्’ करने को मंजूरी
विपक्ष के हंगामे के कारण आज भी नहीं हुई चर्चा
नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच दो महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिए गए। इनमें राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 और केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। दोनों विधेयकों को संबंधित मंत्रियों ने सदन में पेश किया, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण इन पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक पेश करते हुए कहा कि इससे एनसीडीसी के अधिकार क्षेत्र और वित्तीय क्षमताओं का विस्तार होगा। प्रस्तावित संशोधन के बाद एनसीडीसी को सहकारी समितियों के अलावा सहकारी क्षेत्र के विकास से जुड़ी अन्य संस्थाओं और इकाइयों को सीधे ऋण और अनुदान देने की शक्ति मिल सकेगी। सरकार का कहना है कि इससे सहकारी क्षेत्र को वित्तीय मजबूती मिलेगी और विकास योजनाओं को गति मिलेगी।
एनसीडीसी सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना 1963 में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 के तहत हुई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य कृषि उत्पादों और खाद्य पदार्थों के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण तथा आयात-निर्यात से जुड़ी सहकारी गतिविधियों को बढ़ावा देना और उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। नए संशोधन के जरिए इसके कार्यक्षेत्र को और व्यापक बनाने का प्रस्ताव है।
वहीं, लोकसभा ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम्’ करने से संबंधित विधेयक भी बिना चर्चा के पारित कर दिया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच विधेयक सदन में रखा। उन्होंने बताया कि केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था।
प्रस्तावित बदलाव के तहत संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम्’ किया जाएगा। सरकार के अनुसार, ‘केरलम्’ नाम मलयालम भाषा में व्यापक रूप से प्रचलित है और राज्य की भाषाई एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है।
यह बदलाव संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किया जा रहा है। यह अनुच्छेद संसद को राज्यों के गठन के साथ-साथ उनके क्षेत्रफल, सीमाओं और नामों में बदलाव का अधिकार देता है। दोनों विधेयकों के पारित होने के दौरान विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया, जिसके कारण सामान्य संसदीय चर्चा नहीं हो सकी।

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