अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस : प्रदेश के चार बायोलॉजिकल पार्कों में 18 टाइगर, अकेले नाहरगढ़ में दहाड़ रहे 14 टाइगर
तीन माह के शावक से लेकर नौ साल का बाघ भी
जयपुर। राजस्थान के बायोलॉजिकल पार्कों में यदि सबसे अधिक बाघों का बसेरा कहीं है तो वह जयपुर का नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क है। यहां बाघ, बाघिन और शावकों को मिलाकर कुल 14 टाइगर मौजूद हैं। खास बात यह है कि यहां गोल्डन बाघों के साथ-साथ सफेद बाघ भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं।
अन्य बायोलॉजिकल पार्कों में इनकी संख्या
जयपुर के अलावा प्रदेश के अन्य बायोलॉजिकल पार्कों में टाइगरों की संख्या काफी कम है। उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में एक बाघिन, कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में एक बाघिन है। जबकि जोधपुर के माचिया बायोलॉजिकल पार्क में एक बाघ और एक बाघिन मौजूद हैं।
सफारी में सफेद बाघों का रोमांच
नाहरगढ़ टाइगर सफारी में बाघ गुलाब, सफेद बाघ भीम, बाघिन भक्ति, चमेली और स्कंदी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के एसीएफ जितेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि रणथम्भौर टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू कर लाए गए बाघ रणवीर को भी ऑफ डिस्प्ले रखा गया है। वर्तमान में पार्क में सबसे कम उम्र का टाइगर तीन माह का शावक है। जबकि सबसे अधिक उम्र का बाघ शिवाजी लगभग नौ वर्ष का है। उन्होंने बताया कि तीन माह के शावक की देखरेख बायोलॉजिकल पार्क के उपनिदेशक डॉ.अरविंद माथुर की निगरानी में की जा रही है।
शावक ऑफ डिस्प्ले में
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ शिवाजी, बाघिन रानी तथा उनके पांच शावक विजय, सूर्या, शौर्य, वृंदा और अम्बे हैं। इन शावकों को फिलहाल ऑफ डिस्प्ले रखा गया है।
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में इस समय बाघ, बाघिन और शावकों को मिलाकर इनकी संख्या 14 है। यहां नाहरगढ़ टाइगर सफारी में दिसंबर 2024 से जून 2026 के बीच 24,882 पर्यटकों ने सफारी की है। इस अवधि में विभाग को 51 लाख 76 हजार से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। सफेद बाघ भी यहां के मुख्य आकर्षण का केन्द्र है।
-विजयपाल सिंह, डीसीएफ, नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क

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