68 की हुईं नीतू सिंह : बाल कलाकार से बॉलीवुड की सुपरस्टार बनने तक का शानदार सफर
फिल्मों में वापसी की और आज भी अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री नीतू सिंह आज 68 वर्ष की हो गईं। बाल कलाकार के रूप में अपने फिल्मी सफर की शुरुआत करने वाली नीतू सिंह ने 1970 और 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में अपनी पहचान बनाई। 8 जुलाई 1958 को जन्मीं नीतू सिंह को बचपन से ही नृत्य में विशेष रुचि थी। उनकी मां राजी सिंह ने उन्हें वैजयंतीमाला के नृत्य विद्यालय में प्रशिक्षण दिलाया। नृत्य सीखने के दौरान वैजयंतीमाला उनकी प्रतिभा से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने अपनी फिल्म 'सूरज' में उन्हें बाल कलाकार के रूप में काम करने का अवसर दिया। इसके बाद नीतू सिंह ने 1960 के दशक में कई फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया। वर्ष 1968 में प्रदर्शित 'दो कलियां' में उनकी दोहरी भूमिका और उन पर फिल्माया गया गीत 'बच्चे मन के सच्चे' आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। नीतू सिंह ने अभिनेत्री के रूप में वर्ष 1973 में प्रदर्शित फिल्म 'रिक्शावाला' से अपने करियर की शुरुआत की। फिल्म में उनके नायक रणधीर कपूर थे, लेकिन कमजोर कहानी और निर्देशन के कारण फिल्म सफल नहीं हो सकी। उसी वर्ष नासिर हुसैन की फिल्म 'यादों की बारात' में निभाई गई छोटी-सी भूमिका ने उन्हें पहचान दिलाई। इस फिल्म का गीत 'लेकर हम दीवाना दिल' उस दौर का बेहद लोकप्रिय गीत बना।
'यादों की बारात' की सफलता के बावजूद नीतू सिंह को लगभग दो वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने 'शतरंज के मोहरे', 'आशियाना' और 'हवस' जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। वर्ष 1975 में प्रदर्शित 'खेल खेल में' उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। ऋषि कपूर के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया और फिल्म सुपरहिट रही। इसी वर्ष उन्हें 'दीवार' और 'रफूचक्कर' जैसी सफल फिल्मों में भी काम करने का अवसर मिला। इसके बाद नीतू सिंह और ऋषि कपूर की जोड़ी ने 'जहरीला इंसान', 'जिंदादिल', 'कभी-कभी', 'अमर अकबर एंथनी', 'अनजाने', 'दुनिया मेरी जेब में', 'झूठा कहीं का', 'धन दौलत' और 'दूसरा आदमी' जैसी अनेक फिल्मों में युवा प्रेम की भावनाओं को पर्दे पर जीवंत किया। यह जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे सफल और लोकप्रिय जोड़ियों में गिनी जाती है।
1980 के दशक में नीतू सिंह हिंदी फिल्म उद्योग की शीर्ष अभिनेत्रियों में शामिल थीं। हालांकि उन्हें कई फिल्मों के प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने अभिनेता ऋषि कपूर से विवाह के बाद फिल्म जगत से दूरी बना ली। वर्ष 1982 में प्रदर्शित 'तीसरी आंख' अभिनेत्री के रूप में उनकी अंतिम फिल्म रही।
अपने फिल्मी करियर में नीतू सिंह ने लगभग 60 फिल्मों में अभिनय किया। वर्ष 1979 में प्रदर्शित 'काला पत्थर' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री की श्रेणी में नामांकन मिला। अभिनय के अलावा नीतू सिंह ने 'नगीना', 'खोज', 'बड़े घर की बेटी', 'अमीरी गरीबी', 'श्रीमान आशिक' और 'दरार' जैसी फिल्मों में कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर के रूप में भी काम किया। वर्ष 2013 में प्रदर्शित 'बेशर्म' में उन्होंने अपने पति ऋषि कपूर और पुत्र रणबीर कपूर के साथ अभिनय किया। इसके बाद उन्होंने नए उत्साह के साथ फिल्मों में वापसी की और आज भी अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

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