जयपुर : वास्तुकला की एक चमत्कारी-निराली मिसाल

एक ही गुलाबी रंग में 

जयपुर : वास्तुकला की एक चमत्कारी-निराली मिसाल

मैं जयपुर हूं! आज मैं 298 साल का हो गया हूं! मैं एक खूबसूरत शहर के तौर पर प्रकांड गणितज्ञ, ज्योतिष और शिल्प शास्त्री महाराजा सवाई जयसिंह के उर्वर मस्तिष्क का नमूना हूं।

मैं जयपुर हूं! आज मैं 298 साल का हो गया हूं! मैं एक खूबसूरत शहर के तौर पर प्रकांड गणितज्ञ, ज्योतिष और शिल्प शास्त्री महाराजा सवाई जयसिंह के उर्वर मस्तिष्क का नमूना हूं। मैं वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य की बुद्धिमता का जीता जागता शिल्पचातुर्य हूं। मैं मध्यकालीन भारत के नगरीय प्रारूप गृह शिल्प और वास्तुकला की एक चमत्कारी-निराली मिसाल हूं।अब भी मुझे दुनिया के खूबसूरत शहरों में शामिल किया जाता है। मेरी स्थापना 18 नवम्बर, 1727 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने की थी। मैं जयपुर हूं। तीन ओर अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ हूं। आज भी दुनिया में अपना खास मुकाम रखता हूं। कला और संस्कृति प्रेमी महाराजा जयसिंह ने सबसे पहले गंगापोल पर मेरी नींव रखी। मुझे 2 लाख की आबादी के लिए बसाया गया था और अब मेट्रो सिटी के रूप में बढ़ते-बढ़ते 70 लाख की आबादी का हो चुका हूं। पूरी दुनिया मुझे गुलाबी नगरी के नाम से भी जानती है। सबसे पहले गंगापोल पर राजगुरु पंडित जगन्नाथ सम्राट द्वारा जयपुर की नींव रखी थी।

नौ वर्गों का सिद्धांत :

मुझको ब्रह्माण्ड के नौ भागों में विभक्ति के आधार पर नौ वर्गों के सिद्धांत पर बसाया गया। उत्तर को सुमेरू पर्वत का प्रतीक सर्वोच्च स्थान मानकर चौकड़ी सरहद का नाम दिया गया। मेरी दूसरी चौकड़ियों के नाम चौकड़ी रामचन्द्रजी, चौकड़ी गंगापोल, तोपखाना हजूरी,घाट दरवाजा, चौकड़ी विश्वेश्वरजी, चौकड़ी मोदीखाना, तोपखाना देश और पुरानी बस्ती रखे गए। नौ चौकड़ियों में से एक गंगा पोल चौकड़ी में ताजमी सामंतों को नगर सुरक्षा के लिए बसाया गया था। सुव्यवस्थित रूप से बसे शहर में सीधी सड़कों व सीधी गलियों का योगदान महत्वपूर्ण है। सड़क के दोनों तरफ बसा हुआ बाजार, पैदल चलने वालों के फुटपाथ मेरी शान में इजाफा करते हैं। नौ वर्गों के मध्य में शाही वर्गाकार चौकड़ी सरहद के दोनों सिरों पर दो चौपड़ हैं। एक पूर्वी सिरे पर बड़ी चौपड़ और पश्चिमी सिरे पर छोटी चौपड़, बड़ी चौपड़ से आगे रामगंज बाजार एवं रामगंज चौपड़ है। तीन प्रमुख देवियों महाकाली को रामगंज चौपड़, महालक्ष्मी को बड़ी चौपड़ और माता सरस्वती को छोटी चौपड़ पर विराजमान किया गया।

चारों ओर से सुरक्षित :

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बाजारों में फुटपाथों के नीचे वर्षा के पानी को ले जाने के लिए बड़े-बड़े नाले बने हुए हैं। मुख्य सड़क 108 फीट चौड़ी अन्य सड़कें 54, 26,13,6 चौड़ी हैं। दोनों चौपड़ों के बीच 160 दुकानें हैं। मुख्य सड़क के दोनों ओर मकानों की ऊंचाई आधे से ज्यादा यानी 54 से ज्यादा नहीं रखी गई थी। प्रत्येक चौकड़ी में करीब 400 मोहल्ले होते थे। इन मोहल्लों के नाम उनमें बसे व्यवसायों के नाम पर रखे जाते थे। मुझे चारों ओर से सुरक्षित करने के लिए मजबूत चारदीवारी बनाई गई, ताकि यहां परिंदा भी पर न मार सके। मेरे जैसे खास शहर में घुसने के लिए महाराजा सवाई जयसिंह ने 7 विशालकाय दरवाजे सांगानेरी गेट,शिवपोल, अजमेरी गेट ,किशनपोल, घाटगेट,रामपोल,सूरजपोल, चांदपोल,गंगापोल, ध्रुवपोल,जोरावर सिंह गेट बनवाए थे।

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जयपुर की खूबसूरती :

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न्यू गेट को अजमेरी गेट और सांगानेरी गेट के बीच में बाद में बनाया गया, जहां सीधा रास्ता त्रिपोलिया गेट के लिए जाता है, जो शाही महल सिटी पैलेस का प्रवेश द्वार बनाया गया था। इन सभी बड़े गेट पर बड़े दरवाजे और कोट बनाये गए है। इन्ही दरवाजों को चारदीवारी के जरिए जोड़ा गया ताकि दरवाजों के अलावा कहीं से भी शहर में प्रवेश न हो सके। शहर में घुसने के लिए आज भी यही 8 दरवाजों से होकर निकलना होता है। नाहरगढ़ का किला,जयगढ़, हवामहल, शीश महल,आमेर का किला, जल महल और गढ़गणेश मेरी खूबसूरती में और अधिक चारचांद लगाते हैं। सवाई जयसिंह ने जन्तर.मन्तर का निर्माण किया जो कि ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन में बहुत ही महत्वपूर्ण रहा। कल्कि मन्दिर जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह ने 1739 ई.में सिरहड्योढ़ी बाजार में बनवाया है।

प्रजा की सुख सुविधा :

सवाई जयसिंह के पश्चात् उनके पुत्र ईसरीसिंह ने ईसरलाट,सरगासूली का निर्माण किया। अल्बर्ट हॉल की नींव 6 फरवरी,1876 में महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय के समय प्रिंस अल्बर्ट ने डाली थी। महाराजा माधोसिंह ने इसे पूरा किया तो 21 फरवरी, 1887 को सर एडवर्ड बेडफोर्ड ने इसका उद्घाटन किया। महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय ने कोलकाता के ईडन गार्डन से मिलता जुलता गार्डन रामनिवास बाग बनवाया। अजमेरी गेट स्थित यादगार इमारत का मूल नाम किंग एडवर्ड मेमोरियल है। इंग्लैंड के सम्राट एडवर्ड सप्तम की याद में बने इस मेमोरियल का उद्घाटन 19 नवम्बर 1912 को तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड हॉर्डिज ने जयपुर रियासत की 101तोपों की सलामी के साथ सोने की चाबी से किया था।महाराजा कॉलेज, महारानी कॉलेज,मोतीडूंगरी पैलेस का निर्माण, बॉडीगार्ड लाइन्स,अब शासन सचिवालय भवन, सवाई मानसिंह अस्पताल इत्यादि विशिष्ट भवनों का निर्माण विभिन्न शैलियों एवं वास्तुशिल्प के आधार पर किया गया।

एक ही गुलाबी रंग में :

नगर के बाजारों की इमारतों को एक ही गुलाबी रंग में रंगवाकर मुझे सौन्दर्य की निधि ही बना दिया। मुझे उत्तरोत्तर सुन्दर बनाते जाने का काम सवाई जयसिंह ,सवाई रामसिंह और सवाई मानसिंह से लेकर विद्याधर और मिर्जा इस्माइल तक अनेक उच्च राज्याधिकारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। मुझे बतौर शहर वास्तु के मुताबिक बनाया गया। वास्तु के अनुसार अष्ट सिद्धि व नव निधि से पूर्ण जयपुर दुनिया का अकेला शहर जिसके पास यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के तीन खिताब मौजूद हैं। मेरी प्रशंसा जाकी शोभा जगत में दसहों दिसि छाई कहकर की गई है।

-राकेश जैन कोटखावदा
यह लेखक के अपने विचार हैं। 

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