बांग्लादेश : एक और कटु अनुभव

हिंदुओं के साथ जो अत्याचार हुआ 

बांग्लादेश : एक और कटु अनुभव

1947 में भारत के साथ साथ धर्म के आधार पर पाकिस्तान का भी एक राष्ट्र के रूप में उदय हुआ।

1947 में भारत के साथ साथ धर्म के आधार पर पाकिस्तान का भी एक राष्ट्र के रूप में उदय हुआ। पाकिस्तान को मुस्लिम जनसंख्या के आधार पर दो भूखंड प्राप्त हुए , जिन्हें पश्चिमी एवं पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना गया। राजनैतिक एवं सैन्य नैतृत्व हमेशा पश्चिमी पाकिस्तान के पास रहाए परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान हमेशा शोषित एवं पीड़ित ही रहा। पश्चिमी पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान के साथ भाषाई, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक आधार पर बहुत अत्याचार किए । उर्दू को राष्ट्रभाषा बनाने और बांग्ला को उपेक्षित करने से बंगालियों में भारी असंतोष रहा । बजट का अधिकतम हिस्सा केवल पश्चिमी पाकिस्तान के विकास पर खर्च किया एवं पूर्वी पाक को नजरअंदाज किया गया।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व :

जनसंख्या में अधिक होने के बावजूद पूर्वी पाक को राजनीतिक प्रतिनिधित्व बहुत कम दिया गया । पश्चिमी पाकिस्तान के जुल्मों के खिलाफ मुजीबुर्रहमान के नैतृत्व में जनआन्दोलन प्रारम्भ हुआ । मार्च 1971 में शेख मुजीबुर्रहमान को गिरफ्तार करके पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू किया, जिसके दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा व्यापक अत्याचार, नरसंहार और बलात्कार हुए ।1970 के आम चुनावों में अवामी लीग की जीत के बावजूद पश्चिमी पाकिस्तान के नेताओं एवं सेना ने सत्ता सौंपने से इंकार कर दिया । यही से बांग्लादेश के जन्म की कहानी शुरू हुई। इन अत्याचारों के कारण लाखों लोगों ने भारत में शरण लीए जिससे एक बड़ा शरणार्थी संकट पैदा हुआ और यही से भारत का हस्तक्षेप प्रारम्भ हुआ।

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम :

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यह हस्तक्षेप अन्ततः भारत पाक युद्ध बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में परिवर्तित हुआ । 13 दिनों का युद्ध 16 दिसंबरए 1971 को समाप्त हुआ । जनरल मानेकशा के मजबूत एवं कुशल नैतृत्व में भारतीय सेना और बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी के सामने पाकिस्तानी सेना के 93000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया ।1971 के भारत पाक युद्ध की एक मात्र वजह पूर्वी पाकिस्तान के नागरिकों को पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों से मुक्ति दिलाना था। इस युद्ध में अमेरिका ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया। अन्तर्राष्ट्रीय खतरों से खेलते हुए भारत ने पाक को धराशायी किया एवं पूर्वी पाकिस्तान को बांग्लादेश में बदल दिया। पूरी दुनिया ने बांग्लादेश के रूप में एक नये राष्ट्र के निर्माण में भारत के प्रत्यक्ष योगदान को स्वीकार किया।

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एक राष्ट्र के रूप में :

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विश्व में बांग्लादेश को एक राष्ट्र के रूप में भारत ने ही सबसे पहले मान्यता प्रदान की । तब अन्य देशों ने बांग्लादेश को स्वीकार किया । भारत सरकार ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान बांग्लादेश के शरणार्थियों की सहायता के लिए भारतीय जनता से दान एवं विशेष डाक टिकटों से धन एकत्रित किया। बांग्लादेश निर्माण में आम भारतीय नागरिकों का भी प्रत्यक्ष योगदान रहा है। भारत ने बांग्लादेश को हमेशा अपना छोटा भाई समझकर हर संभव मदद की । परन्तु दुर्भाग्य है कि यह भाई दुर्योधन दुशासन ही सिद्ध होता जा रहा है । बांग्लादेश को गेंहूँ एवं चावल जैसी जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति भारत करता है। बांग्लादेश मुख्यरूप से दुनिया को रेडीमेड कपड़ों का निर्यात करके विदेशी मुद्रा अर्जित करता है जिसका आधार भारतीय कपास एवं धागे ही हैं।

देश और दुनिया के :

अघोषित हिन्दू राष्ट्र भारत बांग्लादेश को उसके जन्म से लेकर आज तक पल्लवित कर रहा है फिर भी वहाँ हिंदुओं की लगातार घटती आबादी उनके दुःख दर्द की ही अभिव्यक्ति है । भारत में मुसलमानों की आबादी का लगातार बढ़ना यह सिद्ध करता है कि वे यहाँ पूर्ण शान्ति एवं प्रतिष्ठा से जीवन जी रहे हैं । देश और दुनिया के धार्मिक संतुलन में होने वाला यह परिवर्तन हमें किस दिशा में ले जाएगा इस पर चिन्तन होना चाहिये । धर्म निरपेक्षता तथा गंगा जमुना तहज़ीब के नारों की आवाज में हमें हमारे इतिहास और आज की वास्तविकता को नजरंदाज नहीं करना चाहिये। भारत हर बार एक ही गलती को दोहराता आ रहा है और उसके दुष्परिणाम भी भुगत रहा है, फिर भी सुधर नहीं रहा है।

हिंदुओं के साथ जो अत्याचार हुआ :

लोगों को पहचानने में हर बार की इस भूल से ही भारत टूटता गया, बिखरता गया और अपमानित होता गया । दुश्मन को बार बार माफ करने की तथाकथित बड़प्पन वाली मानसिकता को भी छोड़ना होगा । आज बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ जो अत्याचार हो रहे हैं, यह वर्ग विशेष की अहसान फरामोश सोच एवं कार्यप्रणाली का द्योतक है । सुधरना तो हमें ही पड़ेगा । ऐसी अहसान फरामोश कोम पर किसी भी स्थिति में सहानुभूति एवं सहिष्णुता की आवश्यकता नहीं है । लगभग 2 करोड़ रोहिंग्या मुसलमान रोजी रोटी के लिये भारतीय अर्थव्यवस्था एवं प्रजातंत्र पर स्थायी भार बन चुके हैं । हमे उन्हें कठोरता से यह समझाना होगा कि भारत एक राष्ट्र है, धर्मशाला नहीं। यह नया भारत है जो समस्याओं को टालता नहीं, टकराना जानता है और उन्हें मिटाना जानता है । इसी सोच और विश्वास के साथ बांग्लादेश को यथाशीघ्र कठोरता से सबक सिखाना होगा । हिंदुओं के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की सजा मिलने पर ही इतिहास पलटने की गूँज सुनाई देगी।

-प्रो कैलाश सोडाणी
पूर्व कुलगुरु, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा
(यह लेखक के अपने विचार हैं) 

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