कर्नाटक में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बी.के. हरिप्रसाद

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान

कर्नाटक में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बी.के. हरिप्रसाद
कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद के रिक्त होने की संभावना लंबे समय से जताई जा रही थी।

कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद के रिक्त होने की संभावना लंबे समय से जताई जा रही थी। इसी कारण इस महत्वपूर्ण पद को लेकर राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई थी। कई नेता अपने-अपने दावे पेश कर रहे थे और राजनीतिक गलियारों में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा तेज हो गई थी। शुरुआती दौर में इस पद के लिए दो प्रमुख नाम सामने आए थे सतीश जारकीहोली और के.एच. मुनियप्पा। दोनों ही नेता राज्य की राजनीति में प्रभावशाली माने जाते हैं और पिछड़ा वर्ग समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।

समीकरणों का ध्यान :

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया था कि नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में सभी पक्षों और सामाजिक समीकरणों का ध्यान रखा जाएगा। इसी दौरान सतीश जारकीहोली और के.एच. मुनियप्पा के नाम सबसे अधिक चर्चा में रहे। दोनों नेताओं का लंबा राजनीतिक अनुभव और अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना था कि इनमें से किसी एक को अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना अधिक है। हालांकि, राज्य की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण पहलू था। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दोनों ही यह चाहते थे कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में रहे जो उनके साथ तालमेल बनाकर काम कर सके और संगठन में सत्ता का समानांतर केंद्र बन जाए।

संगठनात्मक मामलों की समझ :

Read More टेंडर में कम कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण है क्वालिटी

कांग्रेस की राज्य इकाई में इन दोनों नेताओं का प्रभाव काफी व्यापक है और किसी भी महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय में उनकी राय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यद्यपि अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान को ही लेना था, फिर भी कुछ नेताओं ने सुझाव दिया था कि प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए वरिष्ठ नेताओं की एक समिति बनाई जाए। यह समिति संभावित उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार कर पार्टी नेतृत्व को भेजे और फिर हाईकमान उस पैनल में से किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाए। घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। कांग्रेस हाईकमान ने सभी अटकलों को समाप्त करते हुए बी.के. हरिप्रसाद के नाम की घोषणा कर दी। हरिप्रसाद भी पिछड़ा वर्ग समुदाय से आते हैं और लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं तथा संगठनात्मक मामलों की गहरी समझ रखते हैं।

Read More सशक्त होता भारत, बदलता राजस्थान

राजनीति का व्यापक अनुभव :

Read More राज काज में क्या है खास, जानें

हरिप्रसाद का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों की राजनीति का व्यापक अनुभव रखते हैं। उनके पास संगठन चलाने का अनुभव है और वे पार्टी के विभिन्न गुटों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम माने जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सिद्धारमैया ने कहा था कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि वे राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं और दिल्ली में संगठनात्मक कार्य संभालें। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि फिलहाल वे कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहना पसंद करेंगे। डी.के. शिवकुमार को लगभग छह वर्ष पहले कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। उन्हें गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है।

मजबूत दावेदारों में शामिल :

2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत के पीछे भी उनकी भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना गया। उस समय वे मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल थे। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद दिया गया। इसके साथ ही उन्हें उनकी पसंद के विभाग भी सौंपे गए। उस समय यह भी माना गया था कि वे 2024 के लोकसभा चुनाव तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे। लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदलती रहीं और उन पर अध्यक्ष पद छोड़ने का कोई विशेष दबाव नहीं बनाया गया। इस कारण वे संगठन और सरकार दोनों में समान रूप से प्रभावशाली बने रहे।

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान :

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी शिवकुमार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही थी। राहुल गांधी की इस यात्रा का कर्नाटक चरण विशेष रूप से सफल माना गया और इसके पीछे शिवकुमार की रणनीतिक क्षमता और संगठनात्मक कौशल को प्रमुख कारण बताया गया। जहां तक सतीश जारकीहोली का सवाल है, वे कर्नाटक के मराठी भाषी बहुल बेलगावी जिले से आते हैं। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय है। उनके चार अन्य भाई भी विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं और अलग-अलग समय में विधानसभा सदस्य रह चुके हैं। जारकीहोली परिवार को राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के रूप में देखा जाता है।

हरिप्रसाद की नियुक्ति :

शिवकुमार केवल संगठन के भीतर मजबूत पकड़ रखते हैं, बल्कि वे कांग्रेस के सबसे संसाधन-संपन्न नेताओं में भी गिने जाते हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनकी संपत्तियों का मूल्य हजारों करोड़ रुपये बताया जाता है। यही कारण है कि पार्टी के भीतर उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक उपयोगिता लगातार बढ़ती रही है।

कुल मिलाकर बी.के. हरिप्रसाद की नियुक्ति कांग्रेस नेतृत्व के उस प्रयास का हिस्सा दिखाई देती है, जिसके माध्यम से वह कर्नाटक में विभिन्न गुटों के बीच संतुलन बनाना चाहता है। हरिप्रसाद के अनुभव, संगठनात्मक समझ और अपेक्षाकृत सर्वस्वीकार्य छवि को देखते हुए पार्टी को उम्मीद है कि वे आगामी वर्षों में संगठन को मजबूत करेंगे।

-लोकपाल सेठी

यह लेखक के अपने विचार हैं।

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

नींदड़ मोड़ पर मौत का ट्रेलर! : बाइक सवार मां-बेटे को मारी टक्कर, फिर कुचलता हुआ निकला ट्रेलर नींदड़ मोड़ पर मौत का ट्रेलर! : बाइक सवार मां-बेटे को मारी टक्कर, फिर कुचलता हुआ निकला ट्रेलर
हरमाड़ा थाना क्षेत्र के नींदड़ मोड़ चौराहे पर मंगलवार सुबह करीब 9 बजे सीमेंट से भरे तेज रफ्तार ट्रेलर ने...
फीफा वर्ल्ड कप-2026 : जर्मनी ने पहली बार खेल रही कुराकाओ को 7-1 से रौंदा, फेलिक्स नमेचा ने किया टूर्नामेंट का सबसे तेज गोल
पत्नी की तलाश में ससुराल पहुंचा युवक : जवाब नहीं मिला तो टावर पर चढ़ा, रातभर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
रूटीन मिशन बना मौत का सफर : उड़ान भरते ही क्रैश हुआ अमेरिकी B-52 बॉम्बर, 8 लोगों की मौत
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर राजस्थान पुलिस की बड़ी कार्रवाई, एक दिन में 7721 वाहन नपे
केंद्र सरकार का बड़ा फ़ैसला: डीजल, विमान ईंधन के निर्यात पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया, नई दरें आज से लागू
टीसीएस को बड़ा झटका: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, कंपनी को भरना होगा $16.8 करोड़ का हर्जाना