स्मार्ट मीटर से सटीक, पारदर्शी और सुरक्षित ऊर्जा युग

शिकायतों में भारी कमी आई

स्मार्ट मीटर से सटीक, पारदर्शी और सुरक्षित ऊर्जा युग
समग्र विकास की यात्रा में ऊर्जा की निर्बाध और पारदर्शी आपूर्ति अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। पारंपरिक विद्युत वितरण प्रणाली दशकों से मानवीय त्रुटियों, औसत बिलिंग की विसंगतियों, लाइन लॉस और बिजली चोरी जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझती रही है।

समग्र विकास की यात्रा में ऊर्जा की निर्बाध और पारदर्शी आपूर्ति अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। पारंपरिक विद्युत वितरण प्रणाली दशकों से मानवीय त्रुटियों, औसत बिलिंग की विसंगतियों, लाइन लॉस और बिजली चोरी जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझती रही है। इन चुनौतियों का सीधा असर केवल डिस्कॉम्स की वित्तीय सेहत पर पड़ता है, बल्कि अंततः इसका खामियाजा ईमानदार उपभोक्ताओं को भी भुगतना पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए राजस्थान सहित पूरे देश में विद्युत वितरण तंत्र को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान में अभूतपूर्व तेजी देखी जा रही है। प्रदेश में स्मार्ट मीटर स्थापित करने का कार्य आधिकारिक रूप से वर्ष 2020 में प्रारंभ हुआ था। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान लगभग 5 लाख 40 हजार स्मार्ट मीटर लगाए गए थे। केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत देश के लगभग 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विद्युत वितरण निगमों के घाटे को कम करने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है।

राजस्थान देश में पांचवें स्थान पर :

देश भर में अब तक 5 करोड़ 76 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। इस योजना के क्रियान्वयन और मीटर इंस्टॉलेशन की संख्या के आधार पर राजस्थान पूरे देश में पांचवें स्थान पर है। प्रदेश के तीनों प्रमुख विद्युत वितरण निगमों-जयपुर, जोधपुर एवं अजमेर विद्युत वितरण निगम द्वारा अब तक राज्य के 48 लाख 10 हजार विद्युत उपभोक्ताओं के यहां जो स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर डिस्कॉम्स के साथ उपभोक्ताओं के लिए भी फायदेमंद हैं। उपभोक्ताओं को इस नई प्रणाली से सीधे तौर पर कई बड़े लाभ मिल रहे हैं। इनमें रियल-टाइम ऊर्जा खपत की निगरानी, ऊर्जा उपयोग पर पूर्ण नियंत्रण, सटीक बजट प्रबंधन, ऊर्जा की बचत से पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की उन्नत सेवाओं का मार्ग प्रशस्त होना शामिल है। उपभोक्ता किसी भी समय यह देख सकते हैं कि उनके घर में कितनी बिजली खर्च हो रही है। वास्तविक समय में डेटा मिलने से वे गैर-जरूरी बिजली उपकरणों का उपयोग बंद कर अपनी खपत को नियंत्रित कर सकते हैं। पारंपरिक मीटरिंग प्रणाली में सबसे बड़ी शिकायत ह्णगलत रीडिंगह्ण या ह्णएवरेज बिलिंगह्ण को लेकर होती थी, जिसके कारण उपभोक्ताओं को अक्सर दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। वर्तमान में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से सर्वथा मुक्त हैं। उपभोक्ता अब अपने दैनिक, साप्ताहिक एवं मासिक बिजली उपभोग की सटीक जानकारी अपने मोबाइल पर ह्णबिजली मित्रह्ण ऐप के माध्यम से रियल-टाइम प्राप्त कर सकते हैं। इससे बिलिंग की पूरी प्रक्रिया अत्यंत सरल और विश्वसनीय हो गई है।

शिकायतों में भारी कमी आई :

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इस तकनीक के लागू होने से तीनों डिस्कॉम्स में औसत बिलिंग के मामलों में व्यापक गिरावट दर्ज की गई है। जयपुर डिस्कॉम में जहां वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक औसत बिलिंग के प्रकरण 1 लाख 40 हजार थे, वहीं वर्ष 2026 में जनवरी से जून की लघु अवधि में ही यह घटकर मात्र 4,751 रह गए। इसी तरह, अजमेर डिस्कॉम में औसत बिलिंग के मामले 10 लाख 52 हजार से भारी गिरावट के साथ केवल 94,691 पर सिमट गए। जोधपुर डिस्कॉम क्षेत्र में यह विसंगति वाले मामले 15.70 लाख से घटकर महज 3 लाख रह गए। बिलों में त्रुटियों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों में भारी कमी आई है। पारंपरिक व्यवस्था में सोलर उपभोक्ताओं को अलग से ह्णनेट मीटरह्ण लगवाने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था, लेकिन स्मार्ट मीटर खुद ही नेट मीटरिंग का कार्य करने में सक्षम हैं। स्मार्ट मीटर लगने से बिल भुगतान में देरी के कारण यदि किसी उपभोक्ता का कनेक्शन कट जाता है, तो भुगतान के तुरंत बाद बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित प्रणाली से कनेक्शन स्वतः बहाल हो जाता है। इसके लिए तो किसी विद्युत कर्मी को उपभोक्ता के घर जाने की आवश्यकता पड़ती है और ही उपभोक्ता को री-कनेक्शन के लिए लगने वाले 200 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।

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सुरक्षा की दृष्टि से उपयोगी है :

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स्मार्ट मीटर विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से भी उपयोगी है। हाल ही में जयपुर शहर दक्षिण सर्किल में स्मार्ट मीटरों के डेटा के विश्लेषण से उपभोक्ताओं के घरों में क्षतिग्रस्त वायरिंग के कारण हो रहे ह्णअर्थ लीकेज करंटह्ण की पहचान की गई। मोबाइल ऐप के माध्यम से तुरंत 750 उपभोक्ताओं को अलर्ट मैसेज भेजकर इस खराबी को ठीक करने के लिए जागरूक किया गया। उपभोक्ताओं ने इस मैसेज को प्राप्त करते ही तुरंत अपने घरों की वायरिंग दुरुस्त करवाई। इस समय रहते की गई कार्रवाई से संभावित बड़ी जनहानि और दुर्घटनाओं को रोका जा सका। अभियंताओं के लिए भी अब पूरे विद्युत नेटवर्क और ग्रिड की निगरानी करना बेहद सुगम हो गया है। स्मार्ट मीटर के डेटा विश्लेषण से सिस्टम के ओवरलोड होने की जानकारी वास्तविक समय में मिल जाती है। दौसा एवं जयपुर सिटी सर्किल साउथ जैसे क्षेत्रों में ओवरलोड हो रहे डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों की समय रहते पहचान की गई और उनके स्थान पर उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए। स्मार्ट मीटरों के तेज चलने या गलत रीडिंग देने की अफवाहों को दूर करने और उपभोक्ताओं की पूर्ण संतुष्टि के लिए प्रशासन ने बेहद पारदर्शी व्यवस्था की है। प्रदेश के तीनों डिस्कॉम्स में अब तक 64 हजार 206 ह्णचेक मीटरह्ण लगाए जा चुके हैं। इन चेक मीटरों और स्मार्ट मीटरों की रीडिंग का जब गहन तुलनात्मक अध्ययन किया गया, तो स्मार्ट मीटरों की रीडिंग पूरी तरह त्रुटिरहित पाई गई।

सुरक्षित और पारदर्शी ऊर्जा-युग :

स्मार्ट मीटरिंग का सबसे बड़ा नैतिक और सामाजिक लाभ विद्युत चोरी पर अंकुश लगाना है। विद्युत चोरी किसी भी सभ्य समाज के लिए एक अभिशाप है, क्योंकि जब कोई व्यक्ति अवैध रूप से बिजली का उपभोग करता है, तो ग्रिड का घाटा बढ़ता है और अंततः बिजली की दरें बढ़ जाती हैं। इस बढ़ी हुई दर का आर्थिक बोझ उन ईमानदार उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है जो नियमित रूप से अपने बिलों का भुगतान करते हैं। वर्तमान समय की मांग है कि समाज का हर वर्ग इस डिजिटल बदलाव को स्वीकार करे। साथ ही, हमारे जनप्रतिनिधियों से भी यह पुरजोर अपेक्षा है कि वे राजनीतिक लाभ के लिए विद्युत चोरी में लिप्त मुट्ठी भर असामाजिक तत्वों का पक्ष लेने के बजाय राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे बहुसंख्यक ईमानदार उपभोक्ता वर्ग की पुरजोर हिमायत करें। स्मार्ट मीटर एक सटीक, सुरक्षित और पारदर्शी ऊर्जा-युग स्वागत योग्य कदम है।

-मोहनलाल गुप्ता

पूर्व विधायक एवं पूर्व महापौर

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