साइबर अपराध के विरुद्ध राजस्थान की नई सुरक्षा दीवार

शिकायत करना आवश्यक

साइबर अपराध के विरुद्ध राजस्थान की नई सुरक्षा दीवार
डिजिटल क्रांति ने जीवन को जितना सरल, तेज और सुविधाजनक बनाया है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराधों ने भी अपना स्वरूप बदला है।

डिजिटल क्रांति ने जीवन को जितना सरल, तेज और सुविधाजनक बनाया है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराधों ने भी अपना स्वरूप बदला है। कभी बैंक खाते से ठगी तक सीमित दिखाई देने वाला साइबर अपराध आज डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, ऑनलाइन ट्रेडिंग, सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग, पहचान की चोरी, फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ठगी, सेक्सटॉर्शन और एआई आधारित डीपफेक जैसे नए रूपों में सामने आ रहा है। अपराधी अब मोबाइल स्क्रीन के पीछे बैठकर हजारों किलोमीटर दूर से वार कर सकता है। ऐसे समय में साइबर सुरक्षा पुलिस, शासन, समाज और प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी बन गई है। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विशेष निर्देश पर साइबर अपराधों के विरुद्ध व्यापक और बहुस्तरीय रणनीति पर काम किया जा रहा है। यह इस चुनौती की गंभीरता को समझने और उसके अनुरूप पुलिस तंत्र को आधुनिक बनाने का प्रयास है। सरकार का दृष्टिकोण केवल अपराध होने के बाद कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया, तकनीकी जांच, अपराधियों की गिरफ्तारी, धन की बरामदगी, मोबाइल एवं सिम ब्लॉकिंग तथा आमजन में जागरूकता आदि सभी मोर्चों को एक साथ मजबूत करने पर केंद्रित है।

ऑपरेशन साइबर शील्ड :

राजस्थान पुलिस ने इस दिशा में व्यापक कार्यवाही की जा रही है। “ऑपरेशन साइबर शील्ड” के तहत साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने तथा साइबर अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही के लिए 42 हजार 114 शिकायतों का निस्तारण और 84 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पुलिस द्वारा साइबर अपराध को अब पारंपरिक अपराधों की तरह ही गंभीरता से लेकर त्वरित कार्यवाही की जा रही है। साइबर अपराध के हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर विशेष निगरानी की जा रही है। “ऑपरेशन एंटीवायरस” के तहत मेवात क्षेत्र के जिला डीग, भिवाड़ी, भरतपुर और अलवर में डिजिटल अरेस्ट एवं सेक्सटॉर्शन जैसी साइबर अपराध गतिविधियों की रोकथाम के लिए 435 प्रकरण दर्ज कर 1,568 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया तथा 2 हजार 349 मोबाइल जब्त किए गए। पुलिस ने साइबर अपराध के उन नेटवर्क पर प्रहार करने की रणनीति अपनाई है, जहां से संगठित तरीके से देशभर में लोगों को निशाना बनाया जाता है। इसी प्रकार “ऑपरेशन म्यूल हंटर” के तहत म्यूल अकाउंट होल्डरों के विरुद्ध 925 प्रकरण दर्ज, 1,106 गिरफ्तारियां और 2 हजार 607 इंद्राजी कार्यवाही की गई तथा म्यूल खातों से 28 लाख 66 हजार 600 रुपये की बरामदगी की गई। डिजिटल ठगी की पूरी श्रृंखला में बैंक खाते, मोबाइल नंबर, सिम और डिजिटल पहचान महत्वपूर्ण कड़ियां होती हैं।

सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण :

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संदिग्ध मोबाइल फोन और सिम को ब्लॉक करने की कार्यवाही भी प्रभावी ढंग से की जा रही है। पुलिस ने जनवरी 2026 तक 1 लाख 18 हजार 859 सिम और 39 हजार 668 आईएमईआई ब्लॉक किए। गुमशुदा मोबाइलों को तकनीकी माध्यम से ट्रैक कर पीड़ितों को वापस लौटाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण सफलता मिली है। 30 जून 2026 तक सीईआर पोर्टल के माध्यम से 1 लाख 83 हजार गुमशुदा मोबाइलों में से 60 हजार 845 मोबाइल पीड़ितों को वापस लौटाए जा चुके हैं। मोबाइल की वापसी उसमें मौजूद निजी सूचनाओं और डिजिटल पहचान की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। राजस्थान सरकार ने साइबर अपराध के विरुद्ध संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए बजट स्तर पर भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्ष 2026-27 के बजट में राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर-आरफॉरसी की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आरफॉरसी और एआई एनेबल्ड 1930 साइबर अपराध कॉल सेंटर की स्थापना की प्रक्रिया चल रही है तथा आरफॉरसी का संचालन पुलिस मुख्यालय में किया जा रहा है। यह व्यवस्था आने वाले समय में साइबर अपराध की शिकायतों के विश्लेषण, त्वरित प्रतिक्रिया और तकनीकी समन्वय को नई गति दे सकती है। राज्य में साइबर शिकायतों की त्वरित सुनवाई के लिए 1930 साइबर हेल्पलाइन की क्षमता बढ़ाकर 60 लाइन करने की योजना है।

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परिणाम उत्साहजनक हैं :

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साइबर अपराधों के आर्थिक पक्ष पर नियंत्रण के परिणाम उत्साहजनक हैं। वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में साइबर अपराधों में धनराशि की ठगी में लगभग 27 करोड़ 86 लाख रुपये की कमी आई। त्वरित कार्रवाई के कारण होल्ड/लियन राशि में लगभग 65 करोड़ 54 लाख रुपये की वृद्धि हुई। पीड़ितों को राशि वापस लौटाने की दिशा में होल्ड/लियन राशि का प्रतिशत भी जनवरी 2026 के 23.54 प्रतिशत से बढ़कर जून 2026 तक 27 प्रतिशत हुआ। अब पुलिस केवल अपराधी तक पहुंचने की कोशिश के साथ ही पीड़ित के धन को बचाने और वापस दिलाने के प्रति भी गंभीर है। राजस्थान पुलिस की क्षमता निर्माण की दृष्टि से साइबर कमांडो तैयार करने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। वर्ष 2026 में सघन प्रशिक्षण के लिए 54 पुलिसकर्मियों का चयन किया गया। राजस्थान पुलिस के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भी साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन को पर्याप्त महत्व दिया गया है।“वज्र प्रहार” जैसे विशेष अभियानों के तहत संदिग्ध साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर रोकथाम की प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।

शिकायत करना आवश्यक :

साइबर अपराध में सक्रिय हॉटस्पॉट पर निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और स्थानीय पुलिस की कार्यवाही को साथ जोड़कर प्रदेश में अब साइबर अपराध के खिलाफ केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति अपनायी जा रही है। इस लड़ाई का सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा नागरिक स्वयं है। साइबर अपराधी तकनीक से अधिक मानवीय कमजोरी का फायदा उठाता है। इसलिए किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करना, ओटीपी, पिन, सीवीवी या बैंकिंग पासवर्ड साझा न करना, वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी या सरकारी अधिकारी की पहचान पर तुरंत विश्वास न करना, निवेश के असाधारण लाभ के लालच से बचना, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सीमित रखना और किसी भी संदिग्ध डिजिटल गतिविधि की तुरंत शिकायत करना आवश्यक है। आम नागरिकों को यह समझना होगा कि पुलिस या कोई वैध सरकारी एजेंसी फोन अथवा वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल रूप से गिरफ्तार नहीं करती और न ही जांच के नाम पर बैंक खाते में पैसा जमा कराने को कहती है। इसी प्रकार कोई भी बैंक ओटीपी, पिन या पासवर्ड नहीं मांगता। साइबर ठगी होने पर शर्म या भय के कारण चुप रहना अपराधियों के पक्ष में जाता है।

डिजिटल युग में सुरक्षा :

ऐसे मामलों में जितनी जल्दी शिकायत होगी, धन को रोकने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। इसलिए 1930 पर तत्काल संपर्क करना और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य-फोन नंबर, स्क्रीनशॉट, बैंक लेन-देन, लिंक, संदेश आदि-सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

डिजिटल युग में सुरक्षा की परिभाषा बदल चुकी है। अब घर के दरवाजे पर ताला लगाना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी मोबाइल, बैंक खाते और डिजिटल पहचान पर सुरक्षा की मजबूत दीवार खड़ी करना भी है। राजस्थान सरकार और पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध संस्थागत और तकनीकी ढांचा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विशेष निर्देशों के अनुरूप आरफॉरसीए 1930 हेल्पलाइन, साइबर शील्ड, विशेष ऑपरेशन, साइबर कमांडो, सीईआईआर के माध्यम से मोबाइल रिकवरी और वित्तीय लेन-देन पर त्वरित कार्यवाही जैसी पहलें की गई हैं। साइबर सुरक्षा का सबसे मजबूत प्रहरी जागरूक नागरिक ही है। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले नागरिक का एक क्षण का विवेक सबसे पहली सुरक्षा दीवार है। इसलिए राजस्थान को साइबर अपराध मुक्त और सुरक्षित डिजिटल समाज बनाने के लिए जन-जागरूकता भी आवश्यक है।

-डॉ. रवि मेहरड़ा

पुलिस महानिदेशक (सेनि)

 

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