एआई की निगाह में राजस्थानी निकायों के चुनाव : राजस्थान में पार्टियां नहीं, मानो होटल इंडस्ट्री लड़ रही चुनाव
राजस्थान के निकायों में यह इतिहास की सबसे व्यापक और नाटकीय ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’
जयपुर। सोमवार को अधिकतर नगर निकायों में महापौर, सभापति और पालिकाध्यक्ष चुने जाएंगे। लेकिन ऐसा लगता है, मानो पर्यटन विभाग को राजनीतिक दलों के नियंत्रण में हो। पुष्कर के रिसॉर्ट में जयपुर के 85 भाजपा पार्षद हैं। अजमेर के कांग्रेसी पार्षद चार्टर्ड विमान से बेंगलुरु भेजे गए हैं। जोधपुर के पार्षद नाकोड़ाजी में भजन गा रहे हैं। जैसलमेर से कोटा-बूंदी तक पूल पार्टियाँ हैं। सवाईमाधोपुर वाले नागौर हैं। राजस्थान के 309 निकायों में यह इतिहास की सबसे व्यापक, महंगी और नाटकीय ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ है। पिछली बार राज्य में 196 नगर निकाय ही थे। वार्ड भी 7,500 से 10,245 हो गए। पहले चरण के मतदान से ही 11 हजार प्रत्याशी होटल, रिसॉर्ट, मैरिज पैलेस और फार्महाउसों में पहुँचा दिए गए थे। दूसरे चरण में बढ़ोतरी हुई। हारने वालों को 14 सितंबर से घर भेज दिया गया। कई पार्षद 16 दिनों से घर नहीं गए हैं। जयपुर, जोधपुर और कोटा के पार्षदों को 25-26 सितंबर तक शिविरों में रहना पड़ेगा।
600 से अधिक कैंप
‘600 प्लस कैंप’ का आंकड़ा विभिन्न स्तरों पर चल रहा है। तस्वीरें बता रही हैं कि होटल, रिसॉर्ट, धर्मशालाएं, फार्महाउस, मैरिज पैलेस और तीर्थस्थल राजनीतिक दलों के अस्थायी नियंत्रण-कक्ष बन चुके हैं। भाजपा और कांग्रेस के अलग-अलग शिविर हैं; कई जगह निर्दलीयों ने भी अपना अलग बाड़ा बना रखा है।
शिविरों में कहीं फिल्में, कहीं लूडो और क्रिकेट चल रहे हैं। शिविरों के दृश्य डेस्टिनेशन वेडिंग जैसे हैं। जैसलमेर के एक रिसॉर्ट में भाजपा पार्षद विधायक के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम देखते दिखाई दिए। सवाई माधोपुर से स्थानांतरित पार्षद नाचते हुए कैमरे में कैद हुए। रामगंजमंडी के भाजपा शिविर में पूल पार्टी हुई; वीडियो वायरल हुआ तो पार्षदों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए।
प्रशिक्षण नाम, निगरानी काम
भाजपा इन्हें ‘प्रशिक्षण वर्ग’ बताती है। कांग्रेस इन्हें ‘सुरक्षा’। पार्षद का मोबाइल फोन जमा कराओ, बस में बैठाओ, बाहरी संपर्क सीमित करो और खतरा बढ़ते ही होटल बदल दो। सागवाड़ा में कांग्रेस ने पार्षदों को माउंट पहुंचाया तो भाजपा उदयपुर ले गई। ब्यावर कांग्रेस का शिविर पुष्कर से उदयपुर और भाजपा का शिविर कुंभलगढ़ से जवाई बांध खिसका दिया गया।
बिल किस खाते में जाएगा?
निगम चुनाव खर्च की सीमा 3.5 लाख रुपये, परिषद में दो और पालिका में 1.5 लाख रुपये है। लेकिन बाड़ाबंदी पर होने वाला खर्च कई गुना अधिक है—चार और पांच सितारा होटलों के 50 से 100 कमरे, दो सप्ताह तक आवास, लग्जरी बसें, चार्टर्ड विमान, भोजन, मनोरंजन, सुरक्षा और लगातार बदलते ठिकाने। आॅफ सीजन में होटल फुल हैं।

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