आलू का रंग बैंगनी, गुण जानकर चौंक जाएंगे!
आलू के भीतर छिपा पोषण का खजाना
नई दिल्ली। भारतीय रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाला आलू अब छिपे हुए कुपोषण से लड़ने में मददगार साबित हो सकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) ने आलू की नई किस्म ‘कुफरी जामुनिया’ विकसित की है। इसके छिलके और गूदे का रंग बैंगनी है और इसमें सामान्य आलू की तुलना में कई पोषक तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुफरी जामुनिया में एंथोसायनिन नामक प्राकृतिक यौगिक के साथ विटामिन-सी, जिंक और आयरन भी पाया जाता है। एंथोसायनिन जामुन और ब्लूबेरी जैसे फलों में भी मौजूद होता है। आंकड़ों के मुताबिक, 100 ग्राम कुफरी जामुनिया में लगभग 42.75 मिलीग्राम विटामिन-सी होता है, जबकि सामान्य आलू में यह मात्रा 23.15 मिलीग्राम है। इसमें जिंक और आयरन की मात्रा भी सामान्य आलू से अधिक बताई गई है।
वैज्ञानिकों ने वर्ष 2015 में आलू की दो किस्मों के संकरण से इसे विकसित किया। परीक्षणों के बाद 2024 में इसे मंजूरी मिली। इसकी फसल लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है। इसे सब्जी, पराठे, सूप और बेकरी उत्पादों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के सामने इसकी खेती की लागत, बीज की उपलब्धता, बाजार में मांग और पकाने के बाद पोषक तत्वों की मात्रा जैसे सवाल अभी बाकी हैं। इसलिए कुफरी जामुनिया पोषण सुधारने की दिशा में अहम पहल है, लेकिन इसे छिपे कुपोषण का पूर्ण समाधान मानने के लिए और शोध जरूरी है।

Comment List