खाद के साथ दूसरे उत्पाद थमाए तो खैर नहीं, 9 हजार निरीक्षण में 250 विक्रेताओं पर कार्रवाई
दोषियों के लाइसेंस रद्द होंगे
जयपुर। किसानों को खाद के साथ अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने, निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने और उर्वरकों की कालाबाजारी करने वाले विक्रेताओं पर अब सख्ती होगी। कृषि विभाग ने प्रदेश में कृषि आदान विक्रेताओं की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप आधारित निरीक्षण व्यवस्था शुरू की है। इसके माध्यम से अब तक 9 हजार से अधिक निरीक्षण किए हैं, मामलों में 250 से अधिक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की है।
लाइसेंस रद्द और एफआईआर तक का प्रावधान : गोयल ने बताया कि अनियमितताएं प्रमाणित होने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियमए 1955 के लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी। मामले की गंभीरता के अनुसार विक्रय प्राधिकार पत्र निलंबित या निरस्त किया जा सकेगा।
गोदामों से दुकानों तक होगी औचक जांच : प्रदेश के सभी जिलों में विशेष निरीक्षण दल गठित कर उर्वरक कंपनियों, गोदामों तथा थोक और खुदरा विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों की नियमित एवं औचक जांच के निर्देश दिए हैं।
शिकायत पर 24 घंटे में शुरू होगी कार्रवाई : किसानों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रत्येक जिले में उर्वरक शिकायत प्रकोष्ठ या हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। जबरन टैगिंग, कालाबाजारी और अन्य अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू करनी होगी।
खाद के साथ दूसरा उत्पाद खरीदने की बाध्यता नहीं :
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि आयुक्तालय की ओर से 23 अक्टूबर को जारी निर्देशों के अनुसार किसानों को यूरिया, डीएपी या अन्य अनुदानित उर्वरकों के साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक, जैव उर्वरक अथवा अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। जबरन टैगिंग के मामलों में खुदरा विक्रेताओं के साथ थोक विक्रेताओं और संबंधित उर्वरक निर्माता एवं आपूर्तिकर्ता कंपनियों की भूमिका की जांच होगी। उन्होंने कहा कि किसानों का आर्थिक शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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