समुद्री सुरक्षा नियम सख्त, जहाजों पर 8 लाख तक शुल्क और बंदरगाहों पर भारी जुर्माने का प्रावधान: केंद्र
एक्सपायर्ड सुरक्षा प्रमाणपत्र पर जहाज होंगे जब्त
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने समुद्री सुरक्षा का एक नया दायरा तय करते हुए देश भर के जहाजों और बंदरगाहों के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। इसके तहत सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले जहाजों को रोकने, तय उल्लंघनों पर भारी जुर्माना लगाने और कड़े अनुपालन संबंधी प्रावधान किए गए हैं। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 के तहत 2024 के नियमों को प्रतिस्थापित कर मर्चेंट शिपिंग (शिप्स एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है।
अधिसूचना के मुताबिक, मियाद पूरी कर चुके अंतरराष्ट्रीय या तटीय जहाज सुरक्षा प्रमाणपत्र के साथ चलने वाले जलपोत को तब तक रोक कर रखा जाएगा जब तक वैध सर्टिफिकेट पेश नहीं किया जाता। साथ ही, जहाज मालिक को आठ लाख रुपये का तय शुल्क भी चुकाना होगा। इसी तरह, आगमन से पहले भेजी जाने वाली सुरक्षा सूचनाओं में बंदरगाहों या अन्य ब्यौरों के बारे में गलत जानकारी देने वाले जहाजों को भी तब तक रोका जा सकता है, जब तक कि झंडे के साथ सही जानकारी न दी जाए। नियमाें को उल्लंघन करने पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगेगा।
सरकार ने भारतीय बंदरगाहों पर प्रवेश करने वाले जहाजों के लिए अग्रिम सुरक्षा रिपोर्टिंग भी अनिवार्य कर दी है। अधिसूचना में कहा गया है, भारत के अधिकार क्षेत्र के भीतर किसी बंदरगाह में प्रवेश करने वाला प्रत्येक जहाज आगमन-पूर्व अधिसूचना प्रस्तुत करेगा। इस नियम 30 के तहत, यह जानकारी आगमन से कम से कम 96 घंटे पहले प्रस्तुत की जानी चाहिए। 96 घंटे से कम की यात्राओं के लिए, पिछले बंदरगाह से प्रस्थान के दो घंटे के भीतर अधिसूचना प्रस्तुत की जानी चाहिए। योग्य कंपनी सुरक्षा अधिकारियों के बिना संचालन करने वाली या ऐसे अधिकारियों के बारे में गलत विवरण प्रदान करने वाली शिपिंग कंपनियों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। बार-बार अनुपालन न करने पर अतिरिक्त पांच लाख रुपये और प्रासंगिक जहाज सुरक्षा सर्टिफिकेट वापस ले लिया जाएगा।
निर्धारित सुरक्षा उपकरण बनाए रखने या रखने में विफल रहने वाले जहाजों को रोकने और प्रत्येक खराब या गायब वस्तु के लिए एक लाख रुपये के शुल्क का सामना करना पड़ेगा। जहाज के मास्टर या कंपनी सुरक्षा अधिकारी द्वारा महानिदेशक पोत परिवहन को सुरक्षा या छिपकर यात्रा करने वाले की घटनाओं की रिपोर्ट करने में विफलता पर दो लाख रुपये का शुल्क लगेगा। इन नियमों के तहत कवर किए गए जहाजों पर हर तीन महीने में कम से कम एक बार सुरक्षा अभ्यास की भी आवश्यकता होती है, जबकि बंदरगाह सुविधाओं को अनुमोदित सुरक्षा योजनाओं को बनाए रखना होगा, योग्य सुरक्षा अधिकारियों को नियुक्त करना होगा और वार्षिक सुरक्षा सत्यापन से गुजरना होगा। निर्धारित अवधि के भीतर निर्धारित वार्षिक या नवीनीकरण सुरक्षा ऑडिट करने में विफल रहने वाली बंदरगाह सुविधाओं पर दो लाख रुपये का शुल्क लगेगा। बंदरगाह सुविधा सुरक्षा मूल्यांकन या सुरक्षा योजना प्रस्तुत करने में विफलता पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगेगा।
इन नियमों में बंदरगाह सुरक्षा सलाहकार समितियों के माध्यम से समुद्री प्राधिकरणों, सीमा शुल्क, खुफिया एजेंसियों, पुलिस, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के बीच समन्वय का भी प्रावधान है, जहां ऐसी समितियां गठित की जाती हैं। नए नियम आधिकारिक राजपत्र में उनके प्रकाशन की तिथि से लागू होते हैं और कवर किए गए भारतीय जहाजों, भारतीय बंदरगाहों या अपतटीय सुविधाओं का दौरा करने वाले विदेशी जहाजों, बंदरगाह सुविधाओं और उनका संचालन या प्रबंधन करने वाली कंपनियों पर लागू होते हैं।

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