शहरी सरकारों के मुखिया का फैसला आज : 273 निकायों में होगा मतदान, 32 में निर्विरोध अध्यक्ष चुने
बहुमत के बावजूद हर पार्षद महापौर
जयपुर। राजस्थान के शहरों की सरकार का अगला चेहरा सोमवार को तय होगा। पांच नगर निगमों समेत 273 नगरीय निकायों में महापौर, सभापति और चेयरमैन पद के लिए मतदान होगा। सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक पार्षद अपने अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। मतदान खत्म होते ही उसी कक्ष में मतगणना शुरू होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसके अगले दिन 22 सितंबर को उपमहापौर और उपाध्यक्ष चुने जाएंगे। राज्य के 305 नगरीय निकायों में 9 और 11 सितंबर को पार्षदों के चुनाव हुए थे। इनमें से 32 निकायों में अध्यक्ष निर्विरोध चुने जा चुके हैं। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम तथा सूरत नगर पालिका के कुछ वार्डों में पुनर्मतदान के कारण अध्यक्ष का चुनाव 25 सितंबर को होगा।
जयपुर में 78 बनाम 57, फिर भी 15 निर्दलीय अहम
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में भाजपा के 78, कांग्रेस के 57 और 15 निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा ने सुनील कोठारी, जबकि कांग्रेस ने सुनीता मावर को प्रत्याशी बनाया है। जयपुर में मतदान 25 सितंबर को होगा। यहां दोनों प्रमुख दलों के बीच संख्या का अंतर है, लेकिन निर्दलीय पार्षद भी अध्यक्ष पद के चुनाव के समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं। जोधपुर में भाजपा के 45, कांग्रेस के 44 और 10 निर्दलीय पार्षद हैं। यहां मुकाबला संख्या के लिहाज से बेहद करीबी है। भाजपा ने प्रशांत चंद मेहता, कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को प्रत्याशी बनाया है। कोटा में भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 और चार निर्दलीय पार्षद हैं। यहां भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी और कांग्रेस की सुनीता सुमन महापौर प्रत्याशी हैं।
बहुमत के बावजूद हर पार्षद महापौर
इस चुनाव में केवल पार्षदों की संख्या ही नहीं, बल्कि आरक्षण और दलों के भीतर का गणित भी महत्वपूर्ण है। महापौर, अध्यक्ष पदों की आरक्षण लॉटरी इस बार बड़े स्तर पर हुई है। 101 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर में महापौर पद अनारक्षित हैं। अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा और पाली में महिला महापौर अनिवार्य है, जबकि कोटा में ओबीसी महिला के लिए पद आरक्षित है। इसलिए किसी निकाय में बहुमत रखने वाला दल भी हर पार्षद को महापौर पद का उम्मीदवार नहीं बना सकता। अब असली परीक्षा पार्षदों को एकजुट रखने की है।
आज पांच निगमों में महापौर की परीक्षा
सोमवार को उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर नगर निगमों में महापौर का चुनाव होगा। उदयपुर में भाजपा 53 और कांग्रेस 23 पार्षदों के साथ है। बीकानेर में कांग्रेस के 42 पार्षद जबकि भाजपा के 27 हैं। अलवर में भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और 14 निर्दलीय हैं। पाली में कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और 15 निर्दलीय हैं। अजमेर में कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और 11 निर्दलीय पार्षद हैं। ऐसे में कहीं एक दल के पास स्पष्ट बढ़त है तो कहीं कांग्रेस-भाजपा के बीच अंतर कम है और निर्दलीयों की संख्या भी समीकरण में मौजूद है। 32 निकायों में अध्यक्ष निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इनमें 28 अध्यक्ष भाजपा, दो कांग्रेस और दो भाजपा समर्थित निर्दलीय बताए गए हैं। भरतपुर में भाजपा की अनुराधा, भीलवाड़ा में भाजपा की जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुनी गईं।
201 निकायों में सीधा मुकाबला, बाकी में बहुकोणीय तस्वीर
राज्य निर्वाचन विभाग के अनुसार 201 निकायों में अध्यक्ष पद के लिए सीधा मुकाबला है। इनमें 172 नगर पालिकाएं, 24 नगर परिषद और पांच नगर निगम शामिल हैं। बाकी निकायों में निर्दलीय या तीसरे दल के प्रत्याशियों के कारण मुकाबला बहुकोणीय है। कई जगह बागी और निर्दलीय पार्षद अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्णायक भूमिका में हैं। वार्ड स्तर पर भाजपा के 4,182 पार्षद हैं। कांग्रेस के 3,619 और निर्दलीयों के 2,273 पार्षद हैं। करीब 86 निकायों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत बताया गया है। बीकानेर में कांग्रेस के पास 42 पार्षदों के साथ बहुमत है। अजमेर और पाली में भी कांग्रेस सबसे बड़ा दल है।

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