जानें राज काज में क्या है खास 

इंतजार सिग्नल का 

जानें राज काज में क्या है खास 

भगवा वालों के स्टेट हेड क्वार्टर में एक हार्ड कोर वर्कर ने अपनी जुबान क्या खोली, कइयों को खुसरफुसर करने का मौका मिल गया।

आंखें हुई लाल :

भगवा वालों के स्टेट हेड क्वार्टर में एक हार्ड कोर वर्कर ने अपनी जुबान क्या खोली, कइयों को खुसरफुसर करने का मौका मिल गया और  तो और भाई साहब की चौकड़ी के लोगों की आंखें भी लाल हुईं। गुजरे जमाने में स्टेट चीफ रहे हवामहल वाले भंवरजी भाई साहब की फोटो पर फूल चढ़ाने के बाद पुरानी बस्ती से ताल्लुक रखने वाले एक हार्ड कोर वर्कर ने उनकी तारीफों के पुल बांधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उसकी बात सुनकर वहां मौजूद लोगों ने एक बार तो जोरदार तालियां भी बजार्इं, लेकिन ज्योंही वर्कर के मुंह से निकला कि उन दिनों भाई साहब ने सिर्फ तीन दिन में स्टेट वर्किंग कमेटी बनाकर 15 दिन में उसकी बैठक बुलाकर अपना विजन पेश कर दिया था। अब बेचारे वर्कर को पता थोड़े ही था, छह माह से लिस्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे बिग ब्रदर की लाल आंखों का सामना करना पड़ेगा। अब हेड क्वाटर पर चार दिनों से हार्ड कोर वर्कर और बिग ब्रदर की ही चर्चा है।

इंतजार सिग्नल का :

सूबे में इन दिनों कई भाई लोगों को सिग्नल का बेसब्री से इंतजार है। सिग्नल भी दलबदल को हरी झण्डी को लेकर है। राज का काज करने में वालों में चर्चा है कि स्टेट से लेकर डिस्ट्रिक्ट लेवल के हाथ वाले कई लीडर्स ने कमल वाले दल का दामन लिया है। जिन बड़े नेताओं को किसी कारण से मौका नहीं मिला, उनको अभी भी उम्मीद है। अब वे रात-दिन दिल्ली से सिग्नल मिलने की बाट जोह रहे हैं। यानी कि हाथ वालों के राज में बीस उंगलियां घी में रखने वाले भाई साहबों का मन भर गया, अब उनकी दल बदलने की सुगबुगाहट हाई स्पीड में है।

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कास्ट लीडरशिप बनाम शक्ति प्रदर्शन :

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देश के लिए सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिन्दूर तथा राज के लिए अघोषित ऑपरेशन लोटस के एक ओर ऑपेरशन की तैयारियां जोरों पर है। अब कास्ट लीडरशिप तीसरे दलों के नेताओं ने अपना शक्ति प्रदर्शन शुरु किया हैं। इसको सफल बनाने के लिए अवाना, बेनीवाल और बैंसला की तिगड़ी दिन-रात काम कर रही है। दोनों बड़े दलों के ठिकानों पर हार्ड कोर वर्कर्स में चर्चा है कि देश, प्रदेश और राज के लिए ऑपरेशन भी एक सतत प्रक्रिया बन चुकी है।

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एक जुमला यह भी :

सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि न्यू डवलपमेंट को लेकर है। जुमले की सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने के साथ इंदिरा गांधी भवन में स्थित पीसीसी के ऑफिस में भी चर्चा हुए बिना नहीं रहती। राज का काज करने वाले भी जुमले को लेकर लंच केबिनों में खुसरफुसर करते हैं। हाथ वाले भाई लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इस न्यू डवलपमेंट वाले जुमले के पीछे का राज क्या है। जुमला है कि राज करने वाले मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं और मंदिरों में पूजा-पाठ करने वालों की संख्या में इजाफा भी हो रहा है। संत भी परशुराम वंशज बनते दिख रहे हैं। अब इन हाथ वाले भाई लोगों को कौन समझाए कि इस न्यू डवलपमेंट वाले जुमले के कई मायने हैं, जिन्हें समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।

-एल. एल. शर्मा 
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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