राज काज में क्या है खास, जानें

माला पहनने की होड़

राज काज में क्या है खास, जानें

सूबे में इन दिनों हाथ वाले भाई लोगों में एक नई सुगबुगाहट है। सुगबुगाहट भी और किसी को लेकर नहीं, बल्कि नेशनल प्रेसीडेंट को लेकर है।

अब नई सुगबुगाहट :

सूबे में इन दिनों हाथ वाले भाई लोगों में एक नई सुगबुगाहट है। सुगबुगाहट भी और किसी को लेकर नहीं बल्कि नेशनल प्रेसीडेंट को लेकर है। इंदिरा गांधी भवन मेंबने हाथ वालों के ठिकाने पर आने वाले हार्ड कोर वर्कर्स नेशनल प्रेसीडेंट को लेकर सुगबुगाहट किए बिना नहीं रहते। कुछ भाई लोग तो जोर देकर दावा करते हैं कि यह सुगबुगाहट हवा में नहीं बल्कि इसमें दम है। सुगबुगाहट है कि हाथ वाली पार्टी में चल रहे माहौल के बीच जोधपुर वाले अशोक जी भाई साहब को नेशनल प्रेसीडेंट की बड़ी जिम्मेदारी मिलने सकती है। वैसे तो भाई साहब को पांच साल पहले भीफर था, लेकिन सूबे के राजनीतिक हालात की वजह से उन्होंने खुद ने ही इसे ठुकरा दिया था, चूंकि सूबे के राजा की कुर्सी भी उनको नहीं छोड़ रही थी। अब सुगबुगाहट करने वाले भाई लोगों को कौन समझाए कि सन्यास आश्रम में कदम रख चुके भाई साहब को भी मन की शांति और एकाग्रता जरूरत है, कि माथापच्ची करने की।

चर्चा में वॉकआउट :

पॉलिटिक्स में किसी प्रोग्राम से नाराज होकर उठकर जाना, कभी-कभी शब्दों से ज्यादा जोरदार बयान बन जाता है। अब देखों ना, बीते दिनों भगवा वाली पार्टी के सूबे के सदर का महिलाओं के प्रोग्राम से नाराज होकर चले जाना भी, कुछ ऐसा ही सीन पेश कर गया कि मानों संवाद की जगह वॉकआउट ही न्यू लैग्वेज बन गई हो। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वाले के ठिकाने पर हार्ड कोर वर्कर्स के एक खेमे में चर्चा है कि प्रोग्राम में मनमाकिफ भीड़ नहीं आई, तो भाई साहब ने किसी ने किसी बहाने मंच छोड़ देना ही सबसे सुरक्षित विकल्प समझा। पॉलिटिक्स में वॉकआउट का यह छोटा सा सीन, दरअसल बड़े सवाल छोड़ गया कि संवाद से दूरी और असहमति से असहजता, क्या यहीं न्यू पॉलिटिक्स की शैली है। 

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खाकी वर्दी और शनि की दशा :

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सूबे में इन दिनों खाकी वाले साहब लोगों पर शनि की साढेÞ साती चल रही है। साहब लोगों के भी समझ में नहीं रहा कि आखिर माजरा क्या है, जिसकी वजह से सारा ठीकरा उनके ही माथे फोडने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। राज का काज करने वाले लंच केबिनों में बतियाते हैं कि सूबे में इन दिनों लगता है कि शनि देव का स्पेशल कैंप पुलिस विभाग में ही लगा हुआ है, जहां देखों, वहीं कोई कोई अफसर आरोपों के घेरे में है, किसी पर रेप का, तो कानून तोड़ने का इल्जाम है, तो कोई खुद न्याय की जमीन पर कब्जा जमाता नजर रहा है। लगता है शनि देव ने भी सोचा होगा कि आम जनता पर असर डालकर क्या फायदा, थोड़ा असर सत्ता के करीब बैठे लोगों पर भी दिखाया जाए। अब इन साहब लोगों को कौन समझाए कि जब पुलिस का डंडा बिना तेल पिलाए, सही नहीं मारता है, उसी तरह शनि के दिन पेड को तेल चढ़ाने से उसकी दशा नहीं लगती।

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माला पहनने की होड़ :

सूबे इन दिनों माला पहनने की होड़ मची हुई है। माला पहनने के लिए कईयों को पापड़ तक बेलने पड़ रहे हैं। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगना नंबर 51 में बने भगवा वाले ठिकाने पर इसकी चर्चा हुए बिना नहीं रहती। चर्चा होना भी लाजमी है, चूंकि इन दिनों जमीन से जुड़े भगवा वाले भाई लोगों में ही माला पहनने की होड़ कुछ ज्यादा ही मची हुई है। वे एक-दूसरे को नीचा दिखाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे। और तो और बेचारे माला के साथ उनको पहनाने वालों का इंतजाम भी खुद ही करते है। चाल-ढाल और हाव-भाव बदलने की टेÑनिंग के लिए टेÑनर तक का जुगाड़ कर रहे हैं। माला पहनने में कई बार तो उनके आगे मुखिया जी भी पीछे रह जाते हैं। अब उनकी मालाओं से लदे होने की मंशा को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।

-एल. एल. शर्मा

(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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