पुष्कर माहेश्वरी सेवा सदन में कृष्ण भवन का लोकार्पण समारोह : माहेश्वरी समाज के दो गुटों में मारपीट, जमकर चले लात-घूंसे
पुलिस और प्रबुद्धजनों ने मशक्कत कर हालात को संभाला
अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के प्रबंधकारिणी के चुनाव को लेकर विवाद उस वक्त हिंसक हो गया, जब नवनिर्मित कृष्ण भवन के लोकार्पण समारोह के दौरान दोनों गुट आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते हंगामे के बीच जमकर लात-घूंसे चलने लगे।
पुष्कर। अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के प्रबंधकारिणी के चुनाव को लेकर विवाद बुधवार को उस वक्त हिंसक हो गया, जब नवनिर्मित कृष्ण भवन के लोकार्पण समारोह के दौरान दोनों गुट आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते हंगामे के बीच जमकर लात-घूंसे चलने लगे। इससे सेवा सदन परिसर और आसपास का पूरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि एक गुट के लोगों को सेवा सदन से बाहर सड़क तक करीब 100-100 मीटर तक दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। देश में प्रबुद्ध समझे जाने वाले समाज को शर्मसार करने वाली घटना से उपजे अफरा-तफरी के माहौल से क्षेत्र में तनाव बना रहा। पुलिस और समाज के प्रबुद्धजनों के हस्तक्षेप के बाद बड़ी मुश्किल से हालात काबू में आए।
यूं चला घटनाक्रम
हुआ यूं कि सेवा सदन के नवनिर्मित कृष्ण भवन का श्री राम जन्मभूमि तीर्थ न्यास अयोध्या के कोषाध्यक्ष राष्ट्रीय संत गोविंददेव गिरी महाराज ने जैसे ही लोकार्पण किया। इसी दौरान सेवा सदन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश सोनी, पूर्व अध्यक्ष जुगल किशोर बिड़ला, श्याम सुंदर बिड़ला, सुभाष काबरा सहित दूसरे गुट के लोग ज्ञापन देने व महाराज का स्वागत करने के नाम पर कार्यक्रम में पहुंचे और नारेबाजी व हंगामा करना शुरू कर दिया। दोनों गुटों की ओर से नारेबाजी होने लगी। एक ओर रामकुमार भूतड़ा गुट के समर्थक गोविंद देव गिरी महाराज के जयकारों से माहौल गूंजा रहे थे, वहीं दूसरी ओर विरोधी गुट अध्यक्ष के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर विरोध जता रहे थे। टकरावपूर्ण माहौल से कुछ क्षणों के लिए स्वयं महाराज भी असहज नजर आए। तनाव के बीच महाराजश्री ने कृष्ण भवन का फीता खोला, शिलालेख से पर्दा हटाया और आवश्यक फोटो सेशन कराया। इसके तुरंत बाद सदन अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा ने पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें कार्यक्रम स्थल से रवाना करवाया।
महाराज के जाते ही घमासान
जैसे ही महाराज कार्यक्रम स्थल से रवाना हुए, दोनों गुटों के बीच कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया और देखते ही देखते हाथापाई शुरू हो गई। गाली-गलौच के बीच दोनों पक्षों में जमकर लात-घूंसे चले व मारपीट हुई। इस दौरान कुछ समाजबंधुओं को परिसर से बाहर सड़क तक दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। समा के बुजुर्ग लोगों को नीं छोड़ा गया। झड़प में कई लोग घायल हुए, जिनमें एक व्यक्ति की आंख पर गंभीर चोट आई, वहीं कई लोगों के कपड़े फट गए। वहीं 75 वर्षीय सेवा सदन के मंत्री मुरलीधर झंवर ने आरोप लगाया कि उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, यहां तक कि गिरने के बाद भी उन्हें लातों से पीटा गया।
विरोधी गुट पहुंचा थाने, नामजद रिपोर्ट दर्ज
घटना के बाद विरोधी गुट ने खंडेलवाल धर्मशाला में बैठक कर रणनीति बनाई और एकजुट होकर पुलिस थाने पहुंचा। पूर्व अध्यक्ष श्याम सुंदर बिड़ला ने कमल चांडक (जोधपुर), विजय शंकर मूंदड़ा, सूरज नारायण लाखोटिया (अजमेर), तेज करण सोनी, ललित सोनी, अभिषेक सोनी, अर्पित काबरा, अक्षय तापड़िया, श्रीगोपाल सोनी, दीपक सोनी सहित 10-15 अन्य के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि अवैधानिक रूप से भवन का लोकार्पण किया गया। जब वे समाज के लोगों के साथ शांतिपूर्ण बातचीत के लिए पहुंचे, तब उनके साथ सामूहिक रूप से मारपीट की गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश सोनी ने आरोप लगाया कि वे केवल ज्ञापन देने पहुंचे थे। इसके बावजूद हम पदाधिकारियों व पूर्व अध्यक्षों पर हमला कराया गया है।
मैंने झगड़ा नहीं देखा: भूतड़ा
वहीं सेवा सदन अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा ने पूरे घटनाक्रम से अनभिज्ञता जताते पत्रकारों से कहा कि वे कार्यक्रम में व्यस्त थे और उन्होंने कोई झगड़ा नहीं देखा। उन्होंने यह भी कहा कि साधारण सभा की बैठक में सर्वसम्मति से कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन कुछ लोग अनावश्यक विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विरोध तो होता ही रहता है, मैं भी सुनते-सुनते मजबूत हो गया हूं। हमने कोई अपराध नहीं किया है और न ही कोई गलत काम करेंगे। तयशुदा काम होने के बाद हम नए चुनाव करा देंगे।

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