कंधों पर सजाए सितारे, परिवार की तीसरी पीढ़ी ने सैनिक के रूप में शुरू की सेवा

युवाओं के लिए मिसाल बना

कंधों पर सजाए सितारे, परिवार की तीसरी पीढ़ी ने सैनिक के रूप में शुरू की सेवा
गिगलाना गांव के दिनेश चौहान ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर देशसेवा का सपना पूरा। दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में बीटेक के बाद मुंबई में रिलायंस हेड ऑफिस में कार्यरत दिनेश ने सितंबर 2025 में सेना ज्वाइन की।

नीमराना। कभी मुंबई के कॉपोर्रेट दफ्तर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने वाले गिगलाना गांव के दिनेश चौहान अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर देश की सेवा करेंगे। कंप्यूटर स्क्रीन से लेकर सैन्य प्रशिक्षण मैदान तक का उनका सफर क्षेत्र के युवाओं के लिए मिसाल बन गया है। कोटपूतली-बहरोड़ जिले के गिगलाना निवासी दिनेश चौहान ने दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई स्थित रिलायंस के हेड ऑफिस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य किया। बेहतर करियर और सुविधाजनक जीवन के बावजूद उनके मन में बचपन से सेना की वर्दी पहनने का सपना था। इसी जुनून ने उन्हें कॉपोर्रेट दुनिया से निकलकर भारतीय सेना की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सितंबर 2025 में उन्होंने भारतीय सेना ज्वाइन की और कठिन सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्हें भारतीय सेना की सिग्नल कोर में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ है।

दादा और पिता के बाद अब बेटे ने संभाली कमान : दिनेश की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके परिवार की गौरवशाली सैन्य परंपरा की अगली कड़ी भी है। उनके दादाजी नरसिंह चौहान भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं, जबकि उनके पिता कैप्टन बजरंग सिंह चौहान सेना में अधिकारी रह चुके हैं। अब तीसरी पीढ़ी के रूप में दिनेश चौहान ने भी वर्दी पहनकर परिवार की देशसेवा की विरासत को आगे बढ़ाया है।

गांव में जश्न, युवाओं के लिए बने प्रेरणा : दिनेश चौहान के लेफ्टिनेंट बनने की खबर मिलते ही गिगलाना गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और क्षत्रिय समाज के लोगों ने उनके परिवार को बधाई दी। लोगों का कहना है कि दिनेश ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो निजी क्षेत्र की आकर्षक नौकरी भी देशसेवा के जुनून के आगे छोटी पड़ जाती है।

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