एएसआई के शुल्क वाले संरक्षित स्मारकों की संशोधित सूची प्रस्तावित, नए स्मारकों को शामिल करने की तैयारी
संरक्षित स्मारकों के नए श्रेणीकरण का प्रस्ताव
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल और अवशेष नियमों के तहत प्रवेश शुल्क वाले संरक्षित स्मारकों की संशोधित सूची प्रस्तावित की है। मसौदे में 30 स्मारकों को श्रेणी ए और 136 को श्रेणी बी में रखा गया है। संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आठ सितंबर को भारत के राजपत्र में मसौदा संशोधन नियम प्रकाशित कर 1959 के नियमों की दूसरी अनुसूची को बदलने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव फिलहाल मसौदा स्तर पर है।
श्रेणी ए में असम के चराइदेव स्थित मोइदाम समूह, बिहार का नालंदा उत्खनित स्थल, गुजरात के चंपानेर स्मारक, रानी-की-वाव और धोलावीरा, कर्नाटक के हम्पी और पट्टदकल स्मारक तथा मध्य प्रदेश के खजुराहो पश्चिमी समूह, सांची के बौद्ध स्मारक और भीमबेटका शैलाश्रय शामिल हैं। महाराष्ट्र में अजंता और एलोरा की गुफाएं, एलीफेंटा, शिवनेरी, लोहगढ़ और रायगढ़ किले तथा दिल्ली में हुमायूं का मकबरा, कुतुब पुरातत्व क्षेत्र और लाल किला श्रेणी ए में रखे गये हैं। ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर, राजस्थान के चित्तौडग़ढ़ और कुंभलगढ़ किले, तमिलनाडु में महाबलीपुरम के स्मारक समूह तथा उत्तर प्रदेश में आगरा किला, ताज स्मारक समूह और फतेहपुर सीकरी भी श्रेणी ए में शामिल हैं। सारनाथ का उत्खनित स्थल और चौखंडी स्तूप भी इस सूची का हिस्सा हैं।
पंजाब के गुरदासपुर के बटाला स्थित शमशेर खान का मकबरा और नूरमहल का सराय एवं प्रवेश द्वार श्रेणी बी में हैं। हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा जिले का कांगड़ा किला और मसरूर का शैल-कट मंदिर एवं मूर्तियां इस श्रेणी में शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर के किरमची मंदिर समूह, रामनगर पैलेस और अवंतीपुरा मंदिर समूह तथा लद्दाख का लेह पैलेस भी श्रेणी बी में रखे गये हैं। अन्य प्रमुख श्रेणी बी स्मारकों में ग्वालियर किला, शनिवारवाड़ा, आगा खान पैलेस, गोलकुंडा किला, वारंगल किला और चारमीनार शामिल हैं। दिल्ली में सफदरजंग का मकबरा, पुराना किला, जंतर-मंतर, तुगलकाबाद किला, फिरोज शाह कोटला और हौज खास को इस श्रेणी में रखा गया है।
केंद्र ने मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किये हैं। राजपत्र में अधिसूचना सार्वजनिक होने के 45 दिन बाद प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाएगा। संशोधन आधिकारिक राजपत्र में अंतिम रूप से प्रकाशित होने के बाद ही प्रभावी होगा।

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