मुआवजे का इंतजार अब भी बरकरार, ठंड में ठिठुर रहे बाढ़ पीड़ित
चार माह बाद भी मुआवजा नहीं ,सर्दी का सितम जारी
बेघर हुए परिवार तिरपालों की टपरियां या टीनशेड के अस्थायी छप्पर बनाकर जीवन गुजार रहे ।
देईखेड़ा। अगस्त माह में हुई अतिवृष्टि से आई भीषण बाढ़ ने खेडिया दुर्जन, पचीपला सहित आसपास के कई गांवों में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ के चलते अनेक परिवारों के घर ढह गए और लोग बेघर हो गए। चार माह बीत जाने के बावजूद आज तक बाढ़ पीड़ितों को मुआवजे की एक रुपया राशि भी नसीब नहीं हुई है। बेघर हुए परिवार मजबूरी में तिरपालों की टपरियां या टीनशेड के अस्थायी छप्पर बनाकर जीवन गुजार रहे हैं। सर्दी के इस मौसम में इन अस्थायी आशियानों में रहना पीड़ितों के लिए किसी यातना से कम नहीं है। रात के समय ठंडी हवाएं तिरपालों को चीरती हुई शरीर में शूल की तरह चुभती हैं।
सीने पर पत्थर रखकर जीने को मजबूर
पचीपला निवासी सियाराम केवट ने बताया कि मेज नदी में उफान आने से गांव की निचली बस्तियों में पानी भर गया था, जिससे कई मकान जमींदोज हो गए। सरकार की ओर से ग्राम पंचायत में शिविर लगाकर आवेदन तो लिए गए, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला। इस सर्दी में बच्चों और परिवार के साथ तिरपाल की टपरी में रहना सीने पर पत्थर रखकर जीने जैसा है।
मुआवजा मिले तो बने फिर से आशियाना
खेडिया दुर्जन निवासी समाजसेवी रामचरण मीणा ने बताया कि बाढ़ के दौरान गांव की निचली बस्तियों में करीब 40 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। पीड़ित परिवार आज भी तिरपाल और टीनशेड के नीचे रहने को मजबूर हैं। यदि समय रहते मुआवजा मिल जाए तो लोग फिर से अपना आशियाना बना सकेंगे। सरकार को बाढ़ पीड़ितों की शीघ्र सुध लेनी चाहिए।
बाढ़ ने सब कुछ उजाड़ दिया। घर ढह गए, फसलें तबाह हो गईं। जान बचना ही बड़ी बात रही, लेकिन अब सर्द रातों में इन टपरियों में रहना बेहद मुश्किल हो गया है।
- सुगना बाई, बाढ़ पीड़िता।
बाढ़ के बाद मुआवजे के लिए फार्म भी भरवाए गए थे, लेकिन चार माह बीतने के बावजूद अभी तक कोई सहायता राशि नहीं मिली।
-लेखराज, पीड़ित।
बाढ़ में क्षतिग्रस्त सभी आवासों का डाटा डीएमआईएस पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है और तहसील स्तर पर कोई कार्य लंबित नहीं है।
- रामभरोस मीणा, तहसीलदार इंद्रगढ़।
पंचायत स्तर की प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है। आगे की कार्रवाई सरकार स्तर पर प्रक्रियाधीन है।
- भानुप्रताप सिंह, विकास अधिकारी।

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