एक्सप्रेसवे भूमि नामांतरण लंबित, किसान सात साल से परेशान
आर्थिक और सामाजिक स्थिति हो रही प्रभावित
भारत माला परियोजना में अधिग्रहित जमीन का रिकॉर्ड अटका।
देईखेड़ा। क्षेत्र में भारत माला योजना के तहत निर्मित एक्सप्रेसवे सड़क के लिए वर्ष 2019 में किसानों की कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन सात वर्ष बीतने के बावजूद अधिग्रहित भूमि का नामांतरण अब तक नहीं खुल पाया है। इससे प्रभावित किसान लंबे समय से परेशान हैं और राजस्व रिकॉर्ड की इस अड़चन के कारण उन्हें गंभीर व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
लबान गांव के किसान महावीर सेन, साहबलाल, कुंजबिहारी मीणा, हरिनारायण और गिरिराज ने बताया कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद उन्हें नियमानुसार क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान कर दिया गया था। इसके पश्चात एक्सप्रेसवे सड़क का निर्माण भी पूर्ण हो गया और वर्तमान में उस पर यातायात सुचारु रूप से संचालित हो रहा है। इसके बावजूद अधिग्रहित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पक्ष में नामांतरण दर्ज नहीं किया गया।
किसानों ने बताया कि नामांतरण लंबित रहने के कारण वे अपनी शेष बची भूमि पर न तो किसी प्रकार का ऋण ले पा रहे हैं और न ही हक त्याग, बेचान या दान जैसी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी कर पा रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो रही है।समाजसेवी रामावतार मीणा ने बताया कि विगत वर्ष राजस्व कर्मियों द्वारा जानकारी दी गई थी कि भारत माला सड़क परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण के बाद प्राप्त नए नक्शों और मूल नक्शों में अंतर पाया गया था। इस कारण उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर नए नक्शे मंगवाए गए, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ और नामांतरण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, जिससे किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
यह कहा अधिकारी ने
भूमि का अधिग्रहण उपखंड अधिकारी स्तर से हुआ था। वहां से तथ्यात्मक जानकारी लेकर संबंधित दस्तावेजों की जांच कर नामांतरण खोलने की कार्यवाही की जाएगी। इतना लंबा समय कैसे निकला, यह तत्कालीन अधिकारी ही बता सकते हैं। किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगा।
- जगदीश शर्मा, नायब तहसीलदार, लाखेरी।
अभी कुछ समय पहले मुझे यहाँ का चार्ज मिला है, मामले को देखकर कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी ।
-रामराज कसाणा, हल्का पटवारी, लबान।

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