कोरोना के बाद अब हंता वायरस का खौफ : कोविड से अलग है चूहों से फैलने वाली गंभीर बीमारी, भीषण गर्मी और चूहों की बढ़ती तादाद रिस्क फेक्टर

दो से चार हफ्ते बाद दिखते हैं लक्षण

कोरोना के बाद अब हंता वायरस का खौफ : कोविड से अलग है चूहों से फैलने वाली गंभीर बीमारी, भीषण गर्मी और चूहों की बढ़ती तादाद रिस्क फेक्टर
हंता वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ी। अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर संक्रमण से तीन लोगों की मौत के बाद विशेषज्ञों ने कहा कि यह कोविड की तरह तेजी से नहीं फैलता। वायरस संक्रमित चूहों की गंदगी से फैलता और फेफड़ों-किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

जयपुर। अटलांटिक महासागर में सैर-सपाटे के लिए निकले एमवी होंडियस क्रूज शिप पर दुर्लभ हंता वायरस संक्रमण से तीन लोगों की मौत और आठ अन्य के संक्रमित होने से पूरी दुनिया की स्वास्थ्य एजेंसियों में हलचल मच गई है। इस शिप पर सवार 149 लोगों में दो भारतीय क्रू मेंबर भी शामिल थे। कोविड महामारी के छह साल बाद किसी नए वायरस का नाम सुनते ही लोगों के मन में दोबारा लॉकडाउन और मास्क का डर सताने लगा है। मेडिकल एक्सपर्ट्स और डब्ल्यूएचओ ने इस वायरस की सच्चाई, कोविड से इसके अंतर और राजस्थान जैसे गर्म राज्यों में इसके रिस्क को लेकर अहम जानकारियां साझा की हैं।

हंता वायरस से डरने की जरूरत नहीं, इंसान से इंसान में नहीं फैलता :

डब्ल्यूएचओ की विशेषज्ञ डॉ. मारिया वान केरखोव ने साफ  किया है कि यह कोविड या इन्फ्लूएंजा बिल्कुल नहीं है। कोविड एक बहुत ज्यादा संक्रामक वायरस था जो एक इंसान से दूसरे इंसान में हवा के जरिए तेजी से फैलता था। इसके उलट हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों की गंदगी से फैलने वाली जूनोटिक बीमारी है। यह सच है कि हंता वायरस कोविड से कहीं ज्यादा जानलेवा है और सीवियर केसेज में डेथ रेट तीस से चालीस प्रतिशत तक हो सकता है लेकिन इसके महामारी बनने के चांस लगभग के बराबर हैं। ब्रिटेन की स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार यह वायरस बाजारों, स्कूलों या ऑफिस में आम संपर्क से नहीं फैलता इसलिए आम जनता को पैनिक करने या डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

सांस के जरिए फैफड़ों में फैलती है बीमारी :

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जयपुर के वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभ्रांशु ने बताया कि हंता वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के सूखे मल, यूरिन या लार के संपर्क में आने से फैलता है। जब यह गंदगी सूखकर धूल में मिलती है और सांस के जरिए लंग्स में जाती है, तब इंसान संक्रमित होता है। अमेरिका के सीडीसी के अनुसार यह फेफड़ों और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। आम तौर पर यह इंसान से इंसान में नहीं फैलता लेकिन क्रूज शिप जैसी बेहद बंद और सीमित जगह में लंबे समय तक केबिन शेयर करने और साथ रहने से इसके फैलने के कुछ मामले देखे गए हैं।

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दो से चार हफ्ते बाद दिखते हैं लक्षण :

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डॉ. शुभ्रांशु ने बताया कि इस वायरस के शरीर में जाने के दो से चार हफ्ते बाद लक्षण उभरते हैं। शुरुआत में मरीज को तेज बुखार, भारी थकान, उल्टी, दस्त और खासकर जांघों पीठ में भयंकर दर्द होता है। अक्सर लोग इसे नॉर्मल फ्लू समझ लेते हैं लेकिन कुछ ही दिनों बाद सूखी खांसी और सांस फूलने की गंभीर समस्या शुरू हो जाती है क्योंकि लंग्स में पानी भरने लगता है। इसका कोई खास इलाज या अप्रूव्ड दवा नहीं है, इसलिए लक्षण दिखते ही सही समय पर अस्पताल पहुंचकर ऑक्सीजन सपोर्ट और मेडिकल केयर लेना ही जान बचाने का इकलौता तरीका है।

राजस्थान में भीषण गर्मी इस वायरस के लिए मुफीद :

विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान में जब तापमान 45 से 50 डिग्री पहुंचता है तो बाहर पानी और खाने की भारी कमी हो जाती है। ऐसे में चूहे और गिलहरी जैसे जीव गर्मी से बचने के लिए सीधे इंसानी बस्तियों, ठंडे घरों और स्टोर रूम में घुसपैठ करते हैं। भीषण गर्मी में चूहों का मल-मूत्र जल्दी सूखकर धूल बन जाता है। जो लोग कंस्ट्रक्शन साइट्स, खेतों या पुराने गोदामों में काम करते हैं, वे जब बिना मास्क के सफाई करते हैं तो यही धूल सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकती है।

अभी हंता वायरस का कोई मामला नहीं :

भारत में अभी हंता वायरस का कोई मामला नहीं आया है। फिर भी हम सतर्क हैं। भारत सरकार से अगर कोई गाइडलाइन इस वायरस को लेकर आएगी तो उसके बाद ही हम इस संबंध में कोई दिशा निर्देश जारी कर सकते हैं।

-डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक जनस्वास्थ्य, राजस्थान

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