AI से होगी टीबी और फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान, विशेषज्ञों ने बताया- एक्स-रे और सीटी स्कैन की जांच में मिलेगी मदद
संदिग्ध गांठों को पकड़ने और मरीजों की प्राथमिकता तय करने में मददगार
जयपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अब टीबी और फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान में तेजी लाई जा सकेगी। एआई चेस्ट एक्स-रे और सीटी स्कैन में संदिग्ध संकेतों की पहचान कर डॉक्टरों को अधिक जोखिम वाले मरीजों की प्राथमिकता तय करने और समय पर जांच शुरू करने में मदद करेगा। यह जानकारी जयपुर में आयोजित नेप कॉन 2026 में विशेषज्ञों ने दी। बी.एम. बिड़ला ऑडिटोरियम में 22 से 25 अक्टूबर तक आयोजित इस 28वें संयुक्त राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित कई देशों के 2,000 से अधिक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया।
एम्स, नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भारत में टीबी और फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते बोझ को देखते हुए एआई तकनीक शुरुआती पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वहीं, वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. राज कुमार ने कहा कि एआई आधारित एक्स-रे स्क्रीनिंग से टीबी की जांच की पहुंच बढ़ेगी और मरीजों को समय पर उपचार से जोड़ने में मदद मिलेगी।
ब्रिटेन के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद मुनव्वर ने बताया कि एआई सीटी स्कैन में संदिग्ध गांठों की पहचान कर सकता है। हालांकि, इसके निष्कर्षों का सत्यापन और विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा जांच जरूरी है। आयोजन अध्यक्ष डॉ. महेंद्र कुमार और सचिव डॉ. विनोद जोशी ने कहा कि एआई आधारित तकनीक को सुलभ बनाकर देशभर में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।

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