आर्मी की आखिरी फुल ड्रेस रिहर्सल : सेना ने ऑपरेशन सिन्दूर कार्यवाही की झांकी दिखाई, बाइक स्टंट करतब ने किया रोमांचित

पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम

आर्मी की आखिरी फुल ड्रेस रिहर्सल : सेना ने ऑपरेशन सिन्दूर कार्यवाही की झांकी दिखाई, बाइक स्टंट करतब ने किया रोमांचित

भारतीय सेना की 78वीं सेना दिवस परेड की तीसरी और अंतिम फुल ड्रेस रिहर्सल का जगतपुरा महल रोड पर आयोजन हुआ। यह रिहर्सल ऐतिहासिक महत्व की थी, क्योंकि जयपुर पहली बार दिल्ली के बाहर और पारंपरिक आर्मी कैंटोनमेंट क्षेत्र से बाहर सार्वजनिक सड़कों पर सेना दिवस परेड की मेजबानी कर रहा।

जयपुर। भारतीय सेना की 78वीं सेना दिवस परेड की तीसरी और अंतिम फुल ड्रेस रिहर्सल का मंगलवार को जगतपुरा महल रोड पर आयोजन हुआ। यह रिहर्सल ऐतिहासिक महत्व की थी, क्योंकि जयपुर पहली बार दिल्ली के बाहर और पारंपरिक आर्मी कैंटोनमेंट क्षेत्र से बाहर सार्वजनिक सड़कों पर सेना दिवस परेड की मेजबानी कर रहा है। मुख्य स्थल जगतपुरा स्थित महल रोड पर सुबह से ही भारी संख्या में आमजन, छात्र, युवा और परिवार जुटे हुए थे। रिहर्सल की शुरुआत सुबह करीब 9 बजे हुई, जिसमें भारतीय थल सेना की विभिन्न टुकड़ियों ने पूर्ण वर्दी में मार्च पास्ट किया। परेड में स्वदेशी हथियारों और उपकरणों का प्रदर्शन प्रमुख आकर्षण रहा। सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में  की गई कार्यवाही की झांकी भी प्रदर्शित की। टी-90 भीष्म टैंक के प्रदर्शन से युवा रोमांचित हुए। सेना के टोरनेडो दल के जवानों ने बाइक स्टंट से हैरतंगेज करतब दिखाकर लोगों का ध्यान खींचा। जवानों ने तेज रफ्तार बाइक पर संतुलन बनाकर परेड कमांडर को सलामी दी।

साथ ही, अशोका पिलर फॉर्मेशन में बाइक स्टंट का प्रदर्शन भी रोमांचकारी रहा। भैरव बटालियन ने विशेष रूप से ध्यान खींचा, जिसकी अनुशासित और शक्तिशाली मार्चिंग ने दर्शकों में जोश भर दिया। पैदल सैनिकों के साथ-साथ घुड़सवार टुकड़ियां, मोटराइज्ड कॉन्टिंजेंट और आधुनिक युद्धक वाहनों जैसे टैंक, आर्टिलरी गन और मिसाइल सिस्टम की झलकियां भी दिखाई दीं। हेलीकॉप्टर और ड्रोन के माध्यम से हवाई शक्ति का भी संक्षिप्त प्रदर्शन किया गया, जो सेना की बहुआयामी क्षमता को रेखांकित करता था। इस रिहर्सल में नेपाल आर्मी की टुकड़ी की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जो भारत-नेपाल के मजबूत रक्षा संबंधों का प्रतीक थी। राजस्थानी संस्कृति को शामिल करते हुए लोक नृत्य और बैंड की प्रस्तुतियां भी परेड में जोड़ी गईं, जिससे यह आयोजन केवल सैन्य प्रदर्शन से बढ़कर सांस्कृतिक उत्सव जैसा प्रतीत हुआ। लेफ्टिनेंट जनरल एच एस वंद्रा जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने रिहर्सल की समीक्षा की और टुकड़ियों को निर्देश दिए।

पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने महल रोड और आसपास के क्षेत्रों में यातायात प्रबंधन किया, जिससे हजारों दर्शकों को सुरक्षित रूप से परेड देखने का अवसर मिला। आमजन में अपार उत्साह देखा गया; कई लोग सेना के जवानों से सेल्फी लेते और जयकारे लगाते नजर आए। यह रिहर्सल 15 जनवरी को होने वाली मुख्य सेना दिवस परेड की अंतिम तैयारी थी, जिसमें सभी टुकड़ियां पूर्ण समन्वय और सटीकता के साथ प्रदर्शन करेंगी।सेना दिवस परेड का यह रूप जयपुरवासियों के लिए गर्व का क्षण साबित हुआ। शहर की गलियों में राष्ट्रभक्ति की लहर दौड़ पड़ी और युवाओं में सेना में शामिल होने की प्रेरणा बढ़ी।

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