ईएनटी चिकित्सा के भविष्य और आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर मंथन, बीमारी की जल्द पहचान और मरीज की जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत उपचार पर जोर
सूक्ष्म बदलावों की पहचान में कर सकता है मदद
जयपुर। इंडियन एकेडमी ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजी एंड हेड-नेक सर्जरी की 12वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन ईएनटी चिकित्सा के भविष्य और आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर विशेषज्ञों ने मंथन किया। तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में ईएनटी चिकित्सा केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बीमारी की जल्द पहचान, रोकथाम और मरीज की जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत उपचार पर जोर रहेगा।
ईएनटी सर्जन डॉ. अनुभूति धानुका ने कहा कि एआई, डिजिटल डायग्नोस्टिक्स, टेली-ईएनटी और मिनिमली इनवेसिव तकनीकें मरीजों की देखभाल को अधिक सुलभ और सटीक बना सकती हैं। एआई एंडोस्कोपी, इमेजिंग और वॉयस एनालिसिस के जरिए बीमारी के शुरुआती और सूक्ष्म बदलावों की पहचान में मदद कर सकता है।
भविष्य उन ईएनटी विशेषज्ञों का होगा, जो सर्जिकल कौशल के साथ डेटा, एआई और मल्टीडिसिप्लिनरी निर्णय क्षमता को जोड़ेंगे। एम्स जोधपुर के डॉ. अमित गोयल की मॉडरेशन में पीजी ट्रेनिंग की चुनौतियों पर चर्चा हुई। कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि दूसरे दिन 30 से अधिक तकनीकी सत्र हुए।

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