विश्व पर्यटन दिवस आज : अब गुलाबी नगरी को सिर्फ देख नहीं रहे पावणे, इसे जी रहे हैं...
विदेशी पर्यटकों के बीच एक्सपीरियंशल टूरिज्म का यह ट्रेंड लगातार उभरा
जयपुर। हेरिटेज गलियों में घूमना, आमेर के किले को निहारना, संग्रहालयों में इतिहास को करीब से देखना और झालाना में बघेरा तलाशना... देशी और विदेशी पर्यटकों के राजस्थान अनुभव की तस्वीर अब यहीं तक सीमित नहीं है। अब वे राजस्थान को सिर्फ कैमरे में कैद करने के बजाय उसे अपनी जिंदगी में उतारकर लौट रहे हैं। खासकर विदेशी पर्यटक का जयपुर में स्थानीय परिवार के साथ रहकर राजस्थानी खाना बनाना, योग करना, संगीत सीखना, मिनिएचर आर्ट, ग्रामीण परिवेश का अनुभव लेना और ब्लू पॉटरी बनाना तथा स्थानीय भाषा-संस्कृति को करीब से समझना उनके सफर का हिस्सा बन रहा है। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार पिछले सात-आठ वर्षों में खासकर विदेशी पर्यटकों के बीच एक्सपीरियंशल टूरिज्म का यह ट्रेंड लगातार उभरा है।
पर्यटक बन रहे ‘स्टूडेंट’: पर्यटन विशेषज्ञ संजय कौशिक का कहना है कि एक्सपीरियंशल टूरिज्म में पर्यटक कुछ घंटों या दिनों के लिए जयपुर की जिंदगी का हिस्सा बनते हैं। स्थानीय परिवार के साथ भोजन तैयार करने से लेकर पारंपरिक कला सीखने तक वे यहां की संस्कृति को खुद अनुभव करते हैं। कई पर्यटक ग्रामीण परिवेश के बारे में जानकारी लेना, योग, संगीत, मिनिएचर पेंटिंग, ब्लू पॉटरी और स्थानीय भाषा सीखने में रुचि दिखा रहे हैं। कहें तो पर्यटक इस दौरान स्टूडेंट बनकर इन गतिविधियों को सीखते हैं। पर्यटन विशेषज्ञ नरेन्द्र सिंह का कहना है कि इस बदलाव से पर्यटक राजस्थान से जुड़ी यादें अपने साथ लेकर जाते हैं। इससे प्रदेश की लोक कला, संस्कृति, खान-पान और पारंपरिक हुनर को विदेशी पर्यटकों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने का अवसर भी बढ़ता है।
‘स्मारक की फोटो’ से ‘यादों के अनुभव’ तक
पहले : किले-महल देखे, फोटो खींची और आगे बढ़े।
अब : स्थानीय परिवार से मिले, खाना बनाया, कला सीखी और संस्कृति को महसूस किया।
- पहले छह माह में (जनवरी से जून) प्रदेश आने वाले घरेलू पर्यटकों की संख्या-10,83,59,405
- पहले छह माह में (जनवरी से जून) प्रदेश आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या- 8,44,696
- पहले छह माह में (जनवरी से जून) जयपुर आए घरेलू पर्यटकों की संख्या- 81,49,183
- पहले छह माह में (जनवरी से जून) जयपुर आए विदेशी पर्यटकों की संख्या- 2,56,293
ग्रामीण जीवन को करीब से समझा
फ्रेडरिक फैमिली का कहना था कि हमारे मन में ग्रामीण परिवेश को करीब से देखने की इच्छा थी। जो राजस्थान आकर पूरी हुई। यहां लोगों का रहन-सहन, खान-पान सहित अन्य गतिविधियों को करीब से जानने और समझने का मौका मिला।
-फ्रांस से आए पर्यटक फैमिली
खाना बनाना, साड़ी पहनना सीखा
फिलिप और स्टेफनी का कहना था कि जयपुर आकर एक फैमिली के साथ यहां के कल्चर को समझा। खासकर खाना बनाना, साड़ी पहनना सीखना अच्छा लगा। कहें तो यहां की कला-संस्कृति, स्थानीय जीवन को जीने का मौका मिला।
-यूएसए से आई पर्यटक फैमिली

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