आपसी संबंध टूटना, फोन ब्लॉक करना या किसी अन्य से संबंध होना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं : हाईकोर्ट
मृतका और आरोपी एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान माना है कि आपसी संबंध टूटना, बातचीत बंद कर फोन ब्लॉक करना या आरोपी का किसी अन्य महिला के साथ संबंध होना आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं माना जा सकता। इन परिस्थितियों को केवल भावात्मक आघात मान सकते हैं। हालांकि यह अलग बात है कि व्यक्तिगत संबंधों के स्तर पर आरोपी का ऐसा व्यवहार असंवेदनशील, दुखदायक या नैतिक रूप से निंदनीय माना जा सकता है, लेकिन यह मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाने के बराबर नहीं माना जा सकता। जस्टिस फरजंद अली ने यह आदेश आरोपी दिनेश मेहरा को जमानत देते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि मृतका और आरोपी एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे, उनके बीच लंबे समय तक संबंध रहे थे। घटना से पहले उनके बीच बातचीत बंद हो गई थी, आरोपी ने मृतका के फोन नंबर ब्लॉक कर दिए थे। वह इससे आहत थी कि आरोपी का जुड़ाव किसी अन्य महिला से है। अपनी मृत्यु से ठीक पहले बनाए वीडियो से भी मृतका की यही पीड़ा और आक्रोश झलकता है। मामले से जुड़े अधिवक्ता डॉ. विभूति भूषण शर्मा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पुलिस थाना सदर में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था। निचली कोर्ट से जमानत नहीं मिलने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

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