एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने किया कमाल : 35 वर्षीया मरीज के जन्म से ही दिल और फेफड़ों के पास थी किडनी

पांच सेमी पथरी फंसी, पीसीएनएल तकनीक से निकाली

एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने किया कमाल : 35 वर्षीया मरीज के जन्म से ही दिल और फेफड़ों के पास थी किडनी

आधुनिक सीटी स्कैन की सहायता से विशेषज्ञों ने फेफड़ों के पास स्थित किडनी तक पहुंचने के लिए एक सुरक्षित मार्ग निर्धारित किया और पीसीएन ट्यूब सफलतापूर्वक डाली।

जयपुर। एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने एक बार फिर चिकित्सा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने 35 वर्षीय महिला मरीज जो कि एक अजीबो गरीब अवस्था से ग्रसित थी। महिला के जन्मजात रूप से ही दिल और फेफड़ों के पास किडनी स्थित है जबकि आमतौर पर किडनी पेट के हिस्से में होती है। इस किडनी में पांच सेंटीमीटर की पथरी जिसे मेडिकल भाषा में स्टैगहॉर्न कैलकुलस कहा जाता है, हो गई थी जिसे चिकित्सकों ने अत्याधुनिक पीसीएनएल तकनीक से निकालने में सफलता प्राप्त की है। चिकित्सकों के अनुसार यह एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल सर्जरी थी, इसलिए जल्द ही इस केस रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजा जाएगा।

इसलिए अनोखा है केस
इस केस को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले एसएमएस अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि इस केस में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि किडनी सामान्यतया पेट में पाई जाने की बजाय जन्मजात रूप से छाती में स्थित थी। इस दुर्लभ अवस्था को इंट्राथोरेसिक किडनी कहा जाता है, जो लाखों में एक बार पाई जाती है। इसमें किडनी फेफड़ों और दिल के करीब स्थित होती है, जिससे कोई भी सर्जरी करना अत्यंत जटिल और जोखिमपूर्ण बन जाता है। इस केस की शुरुआत अस्पताल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग द्वारा की गई। 

आधुनिक सीटी स्कैन की सहायता से विशेषज्ञों ने फेफड़ों के पास स्थित किडनी तक पहुंचने के लिए एक सुरक्षित मार्ग निर्धारित किया और पीसीएन ट्यूब सफलतापूर्वक डाली। पीसीएनएल एक अत्याधुनिक तकनीक है जिसमें त्वचा के एक छोटे से छेद से किडनी में पहुंचकर स्टोन के टुकड़े करके विशेष यंत्रों से निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में सबसे अधिक चुनौती किडनी की असामान्य स्थिति और पास ही मौजूद महत्वपूर्ण अंगों को बचाना था। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि हमारी पूरी टीम वर्क का ही परिणाम था कि सर्जरी एक ही चरण में पूरी हो गई और मरीज को कोई बड़ी जटिलता नहीं हुई। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर है।

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