पहली बार महिला हॉकी का स्वर्ण : पांच साल पहले माता-पिता को खोया, दो साल बाद दुर्घटना में बड़े भाई की हुई मौत ; लेकिन टूटी नहीं निकिता टोप्पो

मैं केवल वर्तमान पर ध्यान देती हूं और परिस्थिति को स्वीकार करती हूं

पहली बार महिला हॉकी का स्वर्ण : पांच साल पहले माता-पिता को खोया, दो साल बाद दुर्घटना में बड़े भाई की हुई मौत ; लेकिन टूटी नहीं निकिता टोप्पो

निकिता टोप्पो की अगुवाई वाली कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंड्ट्रिरयल टेक्नोलॉजी की महिला हॉकी टीम ने आईटीएम को हराकर केआईयूजी महिला हॉकी का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मैच के बाद निकिता ने साई मीडिया से कहा कि इसके पहले हम जोन ही क्लियर नहीं कर पाते थे क्योंकि ओडिशा में कई मजबूत यूनिवर्सिटी टीमें हैं।

जयपुर। निकिता टोप्पो की अगुवाई वाली कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंड्ट्रिरयल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) की महिला हॉकी टीम ने आईटीएम को हराकर केआईयूजी महिला हॉकी का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मैच के बाद निकिता ने साई मीडिया से कहा कि इसके पहले हम जोन ही क्लियर नहीं कर पाते थे क्योंकि ओडिशा में कई मजबूत यूनिवर्सिटी टीमें हैं। लेकिन पिछले साल से मैं और मेरे कोच मिलकर एक मजबूत टीम बनाने पर काम कर रहे थे। अच्छे खिलाड़ियों को यूनिवर्सिटी में एडमिशन दिलाया। जब यहां पहुंचे, तो गोल्ड जीतने का ही लक्ष्य था। फाइनल में निकिता ने डिफेंसिव मिडफील्डर की भूमिका में खेल की रफ्तार नियंत्रित रखी और आईटीएम को गोल की तरफ बढ़ने का कोई मौका नहीं दिया। लेकिन निकिता को जो सबसे अलग बनाता है, वह केवल उनकी हॉकी नहीं, बल्कि उनकी स्पष्ट सोच और अद्भुत धैर्य है। निकिता ने कहा कि मेरा मानना है कि जो हो गया, उसे बदला नहीं जा सकता। मैं केवल वर्तमान पर ध्यान देती हूं और परिस्थिति को स्वीकार करती हूं। मैं अपनी टीम और अपने परिवार के लिए मजबूत रहती हूं। मैं आँसू नहीं बहाती क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मेरी असुरक्षाएं और बुरी घटनाएं मेरे मन को धुंधला करें।

22 वर्षीय निकिता ने पांच साल की उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया था। तीन साल पहले जब वे आयरलैंड में होने वाले अंडर-23 फाइव नेशंस कप में हिस्सा लेने जा रही थीं, तभी उनके बड़े भाई की एक दुर्घटना में मौत हो गई। एक वर्ष बाद उन्हें करियर को खत्म करने वाली चोट लगी और इसके तुरंत बाद उनके दूसरे भाई को भी एक दुर्घटना में गंभीर सिर की चोट लगी, जिससे वह आज तक पूरी तरह उबर नहीं पाया है। लेकिन इन लगातार झटकों से टूटने के बजाय निकिता ने हॉकी को अपना सहारा बनाया और केआईआईटी को राजस्थान में आयोजित खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में महिला हॉकी का पहला स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह केआईआईटी की केआईयूजी में पहली उपस्थिति भी थी। अब निकिता का अल्पकालिक लक्ष्य ओडिशा टीम से सीनियर नेशनल में खेलना और पदक जीतना है, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्य भारत का प्रतिनिधित्व करना और एक स्थाई नौकरी हासिल करना है। 

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