यूनिवर्सिटीज में विमर्श शुल्क पर सदन में हंगामा, जूली और मंत्री के बीच तीखी बहस और हंगामा

बजट 2026-27 में उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान

यूनिवर्सिटीज में विमर्श शुल्क पर सदन में हंगामा, जूली और मंत्री के बीच तीखी बहस और हंगामा

राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विश्वविद्यालयों में विमर्श शुल्क की वसूली को लेकर तीखी बहस और हंगामा। यह मुद्दा विधायक मनीष यादव ने मुख्य रूप से नॉन-कॉलेजिएट छात्रों से ली जाने वाली 1,000 रुपए की विमर्श शुल्क और राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में फीस संरचना से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर उठाया।

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान विश्वविद्यालयों में विमर्श शुल्क की वसूली को लेकर तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। यह मुद्दा विधायक मनीष यादव ने मुख्य रूप से नॉन-कॉलेजिएट छात्रों से ली जाने वाली 1,000 रुपए की विमर्श शुल्क और राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में फीस संरचना से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर उठाया। सदन में विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले विश्वविद्यालयों में छात्रों से जबरन अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है, जो शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि बजट में उच्च शिक्षा के लिए आवंटन कम किया गया है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन फीस बढ़ाकर छात्रों पर बोझ डाल रहा है। उन्होंने विमर्श शुल्क को अनुचित वसूली करार देते हुए इसे तुरंत बंद करने की मांग की। कांग्रेस विधायकों ने दावा किया कि राजस्थान विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों में नॉन-कॉलेजिएट छात्रों से यह शुल्क अनिवार्य रूप से लिया जा रहा है, जिससे लाखों रुपये की अतिरिक्त कमाई हो रही है, लेकिन इसका कोई उचित लेखा-जोखा नहीं है।

सत्ता पक्ष की ओर से डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि विमर्श शुल्क विश्वविद्यालयों की वित्तीय आवश्यकताओं के लिए लिया जाता है और यह छात्रों के परामर्श, मार्गदर्शन तथा प्रशासनिक खर्चों के लिए उपयोग होता है। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया और कहा कि बजट 2026-27 में उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्र कल्याण शामिल हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि फीस संरचना में कोई मनमानी नहीं है और राज्यपाल द्वारा सुझाई गई फीस रिवीजन प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से लागू किया जा रहा है। सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है। चूंकि यूनिवर्सिटी के नियमों को राज्यपाल अंतिम अनुमति देते हैं, इसलिए सदन में आई जानकारी को राज्यपाल तक पहुंचा दिया जाएगा।

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