जमुनिया आईलैंड में आबाद हो रही जल मानुष की दुनिया, आसपास के इलाकों में भी बढ़ रहा इनका फैलाव
कोटा का शुभंकर किया घोषित
चंबल के साफ पानी और प्राकृतिक माहौल में पनप रहा ऊदबिलाव का कुनबा।
कोटा। चंबल नदी के बीच बसे शांत और खूबसूरत जमुनिया आईलैंड में इन दिनों प्रकृति की खास दुनिया फलफूल रही है। यहां ऊदबिलाव का परिवार तेजी से बढ़ रहा है। दुलर्भ प्राणियों की श्रेणी में शामिल जलमानूष जितना शातिर है, उतना ही दिलेर भी होता है। दो साल पहले यहां केवल एक जोड़ा यहां पहुंचा था, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर छह हो गई है। खास बात यह है कि इनमें एक मादा गर्भवती भी है, जिससे आने वाले समय में यह परिवार और बड़ा होने की उम्मीद है। यह चंबल नदी के स्वच्छ पानी और बेहतर प्राकृतिक वातावरण का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
नेचर प्रमोटर ए. एच. जैदी ने बताया कि वर्ष 2024 में ऊदबिलाव का एक जोड़ा कोटा बैराज की डाउनस्ट्रीम से निकलकर जमुनिया आईलैंड पहुंचा था। कुछ समय तक यह जोड़ा चंबल रिवर फ्रंट के आसपास भी देखा गया था। पिछले दो वर्षों में इस जोड़े का परिवार बढ़कर अब छह सदस्यों का हो गया है और यह आईलैंड की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा रहा है।उन्होंने बताया कि मानस गांव के पास बहने वाली चंद्रलोही नदी चंबल में आकर मिलती है। हाल ही में इस संगम क्षेत्र में भी ऊदबिलाव दिखाई दिए हैं, जिससे यह माना जा रहा है कि अब इनका फैलाव आसपास के इलाकों में भी बढ़ रहा है।
बूंदी और कोटा के बीच बसा जमुनिया आईलैंड
बूंदी जिले के केशवरायपाटन के नोताडा और कोटा के बालापुरा के बीच चंबल नदी में कई छोटे-बड़े आईलैंड बने हुए हैं। हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक विविधता के कारण यह क्षेत्र वन्यजीवों और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जमुनिया आईलैंड भी इन्हीं में से एक है, जहां का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है।
प्रकृति प्रेमियों के लिए उम्मीद की नई कहानी
जमुनिया आईलैंड पर ऊदबिलाव के बढ़ते परिवार ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्राकृतिक स्थलों को संरक्षण मिले तो वन्यजीव अपने आप लौट आते हैं। चंबल की लहरों के बीच खेलते जलमानुस अब इस आईलैंड की नई पहचान बनते जा रहे हैं और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
परिवार का कभी नहीं छोड़ते साथ
ऊदबिलाव जितना बहादुर है, उतना ही परिवारवादी भी है। यह समूह में परिवार बनाकर रहते हैं। कोटा में जवाहर सागर की चंबल में परिवार सहित रहते हैं। इनकी फैमिली में 6 से 8 सदस्यों की संख्या होती है। जब इनमें से कोई एक सदस्य खो जाता है तो उसे आवाज देकर ढूंढते हैं। यह विश्वास और एकता के सूत्र से बंधे होते हैं। जब परिवार के किसी सदस्य पर कोई आंच आती है तो उससे निपटने के लिए पूरा परिवार एकजुट हो जाता है और मदद के लिए सभी एक साथ दौड़ पड़ते हैं।
- जुनेद शेख, वन्यजीव प्रेमी
इसीलिए जल मानुष कहलाते हैं
ऊदबिलाव मनुष्य की तरह पैरों पर खड़ा हो जाता है, तब इसका शरीर इंसान जैसा दिखता है। जल व थल दोनों में रहता है इसलिए इसे जल मानुष कहते हैं। यह चिकनी खाल तथा बालों वाला जानवर है। इसकी औसत लम्बाई करीब 15 से 17 इंच होती है। शिकार एवं इसके आवास की कमी के कारण अब यह जीव संकटग्रस्त जीवों की श्रेणी में आ गया है। पूरी दुनिया में 13 तरह के ऊदबिलाव पाए जाते हैं। इसमें से तीन तरह के भारत में मिलते हैं। हमारे देश में कभी इनकी गिनती नहीं हुई है इसलिए इनका सही आंकड़े नहीं मिलते।
- ओजस्वी माहेश्वरी, स्कॉलर
कोटा का शुभंकर किया घोषित
राजस्थान सरकार ने 2016 में ऊदबिलाव को कोटा जिले का शुभंकर घोषित किया है ताकि लोगों को इस प्रजाति को संरक्षित करने के लिए जागरूक किया जा सके। यह मीठे पानी के जलीय आवास में पाया जाता है, जो मछलियों के शिकार करने का शौकीन होता है।आईयूसीएन की सूची में इसे खतरों के प्रति संवदेनशील प्रजाति माना है।
- ए.एच. जैदी, नेचर प्रमोटर

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