राज्यसभा उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगाने के लिए सुक्खू पहुंचे दिल्ली : यह दौरा राजनीतिक रूप से अहम, कांग्रेस समिति के वरिष्ठ नेताओं से मिलने की उम्मीद
नामांकन का समय सीमा खत्म होने से पहले आम सहमति बनने की उम्मीद
हिमाचल की एकमात्र राज्यसभा सीट पर 16 मार्च से पहले सियासी हलचल तेज है। सीएम सुखविंदर सुक्खू दिल्ली में हाईकमान से मंथन कर रहे हैं। 5 मार्च नामांकन की आखिरी तारीख है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा की अकेली सीट के लिए 16 मार्च को होने वाले चुनाव से पहले, मुख्यमंत्री सुखविदर सिंह सुक्खू राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। सुक्खू के इस दौरे को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह दौरा इसलिए भी अहम है, क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार निर्धारित नहीं किया है। मुख्यमंत्री सुक्खू के पार्टी मुख्यालय में कांग्रेस समिति के वरिष्ठ नेताओं से मिलने की उम्मीद है। चर्चा इस बात पर होगी कि पिछली बार की तरह किसी केन्द्रीय नेता को उम्मीदवार बनाया जाए या अंदरूनी नाराजगी से बचने के लिए हिमाचल के किसी उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए। उच्च-स्तरीय बैठक में आखिरी फैसला होने और नामांकन का समय सीमा खत्म होने से पहले आम सहमति बनने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि मौजूदा राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख पांच मार्च है। चार मार्च को होली की छुट्टी होने के कारण नामांकन दाखिल करने के लिए असल में सिर्फ तीन दिन ही बचे हैं। अभी तक न तो कांग्रेस और न ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आधिकारिक तौर पर अपने उम्मीदवार का एलान किया है। दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की यह बैठक 2024 के राज्यसभा चुनाव में लगे झटके को देखते हुए खास तौर पर अहम है। जब केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा का कार्यकाल पूरा हुआ तो इस सीट पर चुनाव हुए थे। विधानसभा में संख्याबल होने के बावजूद छह पार्टी विधायकों के भाजपा का समर्थन करने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार को हार का स्वाद चखना पड़ था।
भाजपा बागी कांग्रेसी विधायकों और तीन निर्दलियों के समर्थन से जीती। उस घटना ने पार्टी की अंदरूनी खामियों को सामने ला दिया और सत्तारूढ़ कांग्रेस को झटका दिया था। इससे सबक लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व इस बार सावधानी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू की केन्द्रीय नेतृ्त्व के साथ बातचीत को असहमति को रोकने और विधायकों को दोबारा बागी होने से रोकने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी उम्मीवाद के लिए कई नामों पर बातचीत चल रही है। केन्द्रीय नेतृत्व में पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल, प्रवक्ता पवन खेड़ा और पूर्व केन्द्रीय मंत्री आनंद शर्मा राज्यसभा जाने के लिए बड़े नाम बने हुए हैं।
राज्य इकाई से स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल, पूर्व हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद प्रतिभा सिंह, वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर और पूर्व मंत्री आशा कुमारी के नामों पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के करीबी नामों में राजनीतिक सलाहकार सुनील बिटू, आईटी सलाहकार गोकुल बुटियाल और मीडिया सलाहकार नरेश चौहान के नाम भी चर्चा में हैं। भाजपा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं क्योंकि उसका कदम कांग्रेस उम्मीदवार के चुनाव पर निर्भर करेगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में नहीं रहने वाले उम्मीदवार को चुनती है तो मुकाबला हो सकता है।

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