अनुपूरक अनुदान मांगों को लेकर वित्त विभाग का परिपत्र जारी, 23 जनवरी तक प्रस्ताव भेजने के निर्देश

स्वीकृत प्रावधान से अधिक व्यय हेतु विधान सभा की अनुमति आवश्यक

अनुपूरक अनुदान मांगों को लेकर वित्त विभाग का परिपत्र जारी, 23 जनवरी तक प्रस्ताव भेजने के निर्देश

राज्य सरकार ने वर्ष  2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों को लेकर वित्त विभाग की ओर से परिपत्र जारी किया है। राजस्थान विधान सभा के आगामी सत्र में इन अनुपूरक अनुदान मांगों को प्रस्तुत किया जाना। परिपत्र के अनुसार, उन सभी मदों को अनुपूरक मांगों में सम्मिलित किया जाएगा, जो वर्ष 2025-26 के मूल आय-व्ययक अनुमान में शामिल नहीं हो पाई थीं या जिनके लिए स्वीकृत प्रावधान से अधिक व्यय हेतु विधान सभा की अनुमति आवश्यक।

जयपुर। राज्य सरकार ने वर्ष  2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों (द्वितीय संकलन) को लेकर वित्त विभाग की ओर से परिपत्र जारी किया है। राजस्थान विधान सभा के आगामी सत्र में इन अनुपूरक अनुदान मांगों को प्रस्तुत किया जाना है। परिपत्र के अनुसार, उन सभी मदों को अनुपूरक मांगों में सम्मिलित किया जाएगा, जो वर्ष 2025-26 के मूल आय-व्ययक अनुमान (बजट) में शामिल नहीं हो पाई थीं या जिनके लिए स्वीकृत प्रावधान से अधिक व्यय हेतु विधान सभा की अनुमति आवश्यक है। वित्त विभाग ने सभी बजट नियंत्रण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने नियंत्रणाधीन विभिन्न शीर्षों के अंतर्गत आवंटित निधियों की गहन समीक्षा करें। मुख्य शीर्ष, उप-शीर्ष, लघु शीर्ष एवं विस्तृत शीर्ष का स्पष्ट उल्लेख करते हुए बजट नियमावली खंड-1, वर्ष 2012 के अध्याय 23 एवं परिशिष्ट-13 के अनुसार अधिक्य और बचत का विवरण तैयार किया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां बजट नियमावली के अध्याय 24 एवं परिशिष्ट-14 के अंतर्गत अनुपूरक अनुदान की मांग का प्रस्ताव तैयार कर 23 जनवरी 2026 तक वित्त विभाग के बजट अनुभाग को अनिवार्य रूप से भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं।

परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राजस्थान आकस्मिकता निधि से स्वीकृत अग्रिम राशि की प्रतिपूर्ति भी अनुपूरक अनुदान मांगों के माध्यम से की जाएगी। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा घोषित नवीन योजनाओं और घोषणाओं के क्रियान्वयन हेतु यदि बजट प्रावधान स्वीकृत नहीं है, तो ऐसे सभी प्रकरण भी अनुपूरक मांगों में शामिल किए जाएंगे। वित्त विभाग ने यह भी चेताया है कि अतिरिक्त निधियों का उपयोग नहीं करने या वास्तविक आवश्यकता से अधिक मांग प्रस्तुत करने पर प्रधान महालेखाकार एवं लेखा समिति द्वारा प्रतिकूल टिप्पणियां की जाती हैं। इसलिए बजट नियंत्रण अधिकारियों को सावधानी बरतते हुए वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप ही अनुपूरक मांगें भेजने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

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