बैकलॉग डेटा अपलोड में अनियमिता को लेकर कार्रवाई के खिलाफ याचिका, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
सभी वाहन सामान्य क्रम में पंजीकृत होते थे
वाहन सॉफ्टवेयर आने के बाद पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में दर्ज करना जरूरी किया गया, जिसे बैकलॉग कहा गया।
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग में साल 2013 के पूर्व के वाहनों के बैकलॉग डेटा को सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने में अनियमिता से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने से जुड़े मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सुनील सैनी और दस अन्य अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि परिवहन विभाग ने एक आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर गत 20 नवंबर और 9 दिसंबर को आदेश जारी कर प्रदेशभर के परिवहन कार्यालयों में एफआईआर दर्ज कराने और विभागीय कार्रवाई आरंभ करने के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि पुराने वाहनों के पंजीकरण के नवीनीकरण, तीन अंक वाले पुराने नंबरों के संरक्षण और साल 2013 से पूर्व के वाहनों के बैकलॉग डेटा को वाहन सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने में गंभीर अनियमिता की गई, जिससे राज्य सरकार को 400 से 600 करोड रुपए तक राजस्व नुकसान हुआ।
याचिका में कहा गया कि जांच समिति ने बिना वित्तीय सलाहकार की रिपोर्ट लिए कथित नुकसान का आरोप लगाया है और ना ही वाहन वार कोई विवरण जारी किया है। इसके अलावा जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा भी नहीं है कि किस नियम की अवहेलना हुई और किस आधार पर आपराधिक मंशा का आरोप लगाया जा रहा है। याचिका में कहा गया कि साल 2013 से पूर्व सारे काम ऑफलाइन होते थे। वहीं वाहन सॉफ्टवेयर आने के बाद पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में दर्ज करना जरूरी किया गया, जिसे बैकलॉग कहा गया। बैकलॉग डेटा अपलोड करना अवैध कार्य न होकर सरकारी आदेशों की पालना थी। इस दौरान कुछ त्रुटियां होने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा जांच समिति ने साल 1989 से पूर्व जारी तीन अंकों के नंबरों को वीआईपी और हेरिटेज नंबर बताकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि उस समय ऐसी कोई श्रेणी मौजूद नहीं थी और सभी वाहन सामान्य क्रम में पंजीकृत होते थे।

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